लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आज प्रयागराज से आए नाविक मजदूर कल्याण समिति (रजि.) के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने मछली पकड़ने के लिए नदियों की नीलामी को तत्काल निरस्त कराने में अपने प्रभाव का प्रयोग करने का आग्रह किया।प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि नाविकों की प्रमुख चिंता पर्यावरण की सुरक्षा है। इसकी अनदेखी के दुष्परिणाम उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश में आई आपदाओं से स्पष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि नाविक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनके साथ अन्याय हो रहा है। उनके पारम्परिक व्यवसाय को दबंगों और माफिया को सौंपा जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन से अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। जंगलों पर अवैध कब्जों के कारण जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों में आ रहे हैं और बाघ-तेंदुए हमले कर रहे हैं। तालाबों पर भी कब्जे हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पानी अपना रास्ता स्वयं बनाता है, नदी जीवन का आधार है। समाजवादी सरकार में गोमती नदी की सफाई कर सुंदर रिवरफ्रंट विकसित किया गया था, जबकि भाजपा सरकार में नदियाँ प्रदूषित और गंदी हो गई हैं, जिससे मछलियों और अन्य जलजीवों का जीवन संकट में है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर जातीय जनगणना कराई जाएगी, ताकि सभी को समानुपातिक आधार पर अधिकार और सम्मान मिल सके। सामाजिक न्याय की स्थापना होगी और नाविक वर्ग भी पीडीए का हिस्सा होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी सरकार बनेगी।अखिलेश यादव ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी के 2027 के घोषणा-पत्र में नाविकों को नई नावें उपलब्ध कराने का वादा शामिल रहेगा। इसके साथ ही निषाद राज गुह्य की प्रतिमा गोमती रिवरफ्रंट पर स्थापित की जाएगी, जिसमें नाव की पतवार सोने की होगी।
ज्ञापन में कहा गया कि नदियों में मत्स्य आखेट करना मछुआरों का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसे छीनने के लिए 2019 में जारी शासनादेश के तहत गंगा, यमुना, टोंस, बेलन आदि नदियों में मछली पकड़ने के लिए कई खंड बनाकर नीलामी का प्रावधान किया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि भाजपा सरकार के निर्णय से मछुआरे बंधक बन गए हैं। टेंडर लेने वाली समितियों की आड़ में पूंजीपतियों, गुंडों और माफिया के साथ अन्य जातियों के लोगों ने ठेके ले लिए हैं, जिससे मछुआरों को बंधुआ मजदूर जैसा जीवन जीना पड़ रहा है। इस काले कानून को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
अखिलेश यादव से मिलकर प्रतिनिधियों ने शासनादेश निरस्त कराने में प्रभाव का प्रयोग करने का आग्रह किया। ज्ञापन देने वालों में पूर्व विधायक प्रत्याशी संदीप यादव, तिजेन्द्र निषाद बजरंगी महासचिव नाविक मजदूर कल्याण समिति प्रयागराज, महेन्दर निषाद, लालजी बिंद एडवोकेट, हरिशंकर निषाद, नितिन निषाद, जितेन्द्र निषाद बजरंगी, शिवदयाल निषाद, महेश निषाद, अरुण निषाद, सागर सूर्या निषाद, नरेंद्र निषाद और धीरज निषाद शामिल रहे।
