लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से ‘‘दिवाली मिलन‘‘ कार्यक्रम के अवसर पर शुभकामना देने वालों का आज तांता लगा रहा। पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं, सांसदों, विधायकों से लेकर नौजवानों, बुजुर्गो, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, व्यापारियों, अधिकारियों, डाक्टरों,सामाजिक और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय, लखनऊ में आकर अखिलेश यादव से भेंट किया।
अखिलेश यादव ने आए हुए सभी लोगोें का आभार जताया और उन्हे भी दीपावली की शुभकामनाएं दी।
अखिलेश यादव ने इस अवसर पर एकत्र जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में अंधेरनगरी चौपट राजा जैसी स्थिति है। कानून व्यवस्था ध्वस्त है, भाजपा राज में अराजकता है, पुलिस हिरासत में मौतें हो रही है। महिलाएं सुरक्षित नहीं है उनके साथ अपराध लगातार बढ़ रही हैं। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार चरम पर है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को अंधकार में पहुंचा दिया है। भाजपा लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखती है। बुलडोजर के जरिए लोकतंत्र और संविधान को रौंदना चाहती है। रामराज में बुलडोजर राज नहीं चलेगा। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी को जनता पर भरोसा है।
समाजवादियों की असली ताकत कार्यकर्ताओं की है। समाजवादी पार्टी के पास सीमित साधन हैं, पर उसकी साख असीमित है। राज्य की जनता समाजवादी पार्टी पर भरोसा करती है। इसलिए समाजवादियों की जिम्मेदारी है कि जनता के विश्वास पर खरा उतरे।
कहा कि इन दिनों उपचुनाव हो रहे है। विधान सभा के चुनाव 2027 में होने हैं। अब इसके गिने चुने दिन बचे हैं। सन् 2022 में हम धोखा खा गए और भाजपा धन-बल और सत्ता के दुरुपयोग से जीत गई। अब कोई चूक नहीं होनी चाहिए। एक-एक कार्यकर्ता की इसमें जिम्मेदारी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान जनता की रक्षा का धर्म है। भाजपा को संविधान बदलने की जल्दी है। वह बाबा साहेब अम्बेडकर जी के बनाए संविधान की विरोधी है। भाजपा को लोकलाज भी नहीं हैं। उससे रामराज की कोई उम्मीद नहीं है।अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के ‘नकारात्मक-नारे’ का असर दिखाई देने लगा है,
दरअसल इस ‘निराश-नारे’ के आने के बाद, उनके बचे-खुचे गिनती के 10 फीसदी समर्थक ये सोचकर और भी निराश हैं कि जिन्हें हम ताकतवर समझ रहे थे, वो तो सत्ता में रहकर भी कमजोरी की ही बातें कर रहे हैं। जिस ‘आदर्श राज्य’ की कल्पना हमारे देश में की जाती है, उसके आधार में ‘अभय’ होता है ‘भय’ नहीं। ये सच है कि ‘भयभीत’ ही ‘भय’ बेचता है क्योंकि जिसके पास जो होगा, वो वही तो बेचेगा।
