के.के. मिश्रा, संवाददाता
संतकबीरनगर। संतकबीरनगर के जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) मनोज कुमार यादव पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी और नियमों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के संबंध में उपनिदेशक, जिला पंचायती राज, मंडल बस्ती द्वारा 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई उत्तर न देने पर उपनिदेशक ने नाराजगी प्रकट करते हुए शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेज दी है।
शिकायत का आधार प्रयागराज के सामाजिक कार्यकर्ता पी. एल. आहूजा द्वारा शासन को भेजे गए पत्र में कुल सात गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं गलत वेतन-लेवल पर वेतन निर्गत कर वेतन में व्यापक हेराफेरी, मूल सेवा पुस्तिका उपलब्ध न कराना, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों का महीनों तक मानदेय रोकना और धनराशि की अवैध मांग, सरकारी वाहन का दुरुपयोग, निजी आवास तक वाहन ले जाना और सफाई कर्मियों से वाहन चलवाना, डीजल की खपत में बड़ी हेराफेरी, लॉग बुक में फर्जी प्रविष्टियाँ, ग्राम पंचायत अधिकारियों और सचिवों का बिना कारण महीनों तक वेतन रोकना, अवैध वसूली के बाद आदेश निर्गत करना, जांच रिपोर्ट रोककर मनमानी और आर्थिक लेन-देन के आरोप। चंद पंचायत अधिकारियों और सचिवों ने नाम न छापने की शर्त पर इन आरोपों की पुष्टि भी की है। शिकायतकर्ता पी. एल. आहूजा ने डीपीआरओ को निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।
उपनिदेशक ने शासन को भेजी रिपोर्ट
नोटिस दिए जाने के बाद भी डीपीआरओ द्वारा कोई स्पष्टीकरण न दिए जाने पर उपनिदेशक, पंचायत राज, मंडल बस्ती के समरजीत यादव ने शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की है। उन्होंने कहा कि “48 घंटे की समय-सीमा के भीतर कोई स्पष्टीकरण न देना यह दर्शाता है कि अधिकारी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया प्रमाणित होती है।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज : सुभासपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद अजीम ने भी पंचायती राज मंत्री को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा “डीपीआरओ के कार्यकाल में भारी भ्रष्टाचार हुआ है जिसकी शिकायत हम लगातार सरकार से करते आ रहे हैं। अब इस पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।”
सूत्रों के अनुसार, यह भी चर्चा है कि उक्त अधिकारी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण वे बिना भय के मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं।
आगे क्या? यदि शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो शिकायतकर्ता पी. एल. आहूजा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर कर सकते हैं, जिसकी चेतावनी वे पहले ही अपने पत्र में दे चुके हैं।
