राकेश कुमार की रिपोर्ट।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुक्रवार को ‘विश्व मृदा दिवस’ के अवसर पर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग से जुड़े सभी कार्मिकों से स्वस्थ, लचीले और टिकाऊ कृषि तंत्र के निर्माण हेतु एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।


उन्होंने कहा कि उपजाऊ और सजीव मिट्टी केवल कृषि उत्पादन का आधार नहीं, बल्कि जल, पर्यावरण, पोषण और भविष्य की खाद्यान्न सुरक्षा की रीढ़ है। यदि मिट्टी के क्षरण और उर्वरक शक्ति में गिरावट की रफ्तार यही रही, तो वर्ष 2050 तक धरती की हरियाली और खाद्यान्न उत्पादन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथ्व्या’ का उल्लेख करते हुए पृथ्वी और मानव के गहरे संबंध पर जोर दिया।
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना वर्ष 2015 से प्रदेश में चल रही है। प्रथम चरण में वर्ष 2015 से 2021 तक ग्रिड आधारित परीक्षणों के आधार पर 3.77 करोड़ किसानों को निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। योजना में किए गए परिवर्तनों के बाद वर्ष 2022 से 2025 की अवधि में चयनित ग्राम पंचायतों में रैंडम सैम्पलिंग के तहत 30.6 लाख किसानों को कार्ड उपलब्ध कराए गए। इस प्रकार खरीफ 2025 तक कुल 4 करोड़ 7 लाख किसानों को कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं।
वर्तमान में प्रदेश भर में कुल 260 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें 179 तहसील स्तरीय, 75 जनपद स्तरीय और 6 शोध केंद्र शामिल हैं। इन प्रयोगशालाओं में 878 संविदा कर्मियों और 525 राजकीय कार्मिकों द्वारा परीक्षण किए जा रहे हैं। भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप 75 जनपदीय प्रयोगशालाओं में से 59 को 12 पैरामीटर पर परीक्षण के लिए एनएबीएल प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जो गुणवत्ता परीक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017–2019 की तुलना में वर्ष 2023–2025 के बीच प्रदेश की मृदा में जीवांश कार्बन, नत्रजन और बोरॉन की उपलब्धता में सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जो किसानों द्वारा किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
हालांकि, जिंक, आयरन और मैगनीज़ जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए बड़े पैमाने पर हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रथम चरण में 20 हजार कुन्तल मिश्रित हरी खाद बीज किट और 80 हजार कुन्तल ढैंचा बीज किसानों को वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त पीएम प्रणाम योजना तथा धरती माता बचाओ अभियान के तहत किसानों को जिप्सम, जैव उर्वरक, एफओएम और कार्बनिक खादों के उपयोग हेतु प्रेरित किया जा रहा है।
मंत्री ने आईआईटी दिल्ली के वर्ष 2024 के अध्ययन का उल्लेख करते हुए बताया कि देश के लगभग 30 प्रतिशत भूभाग में मिट्टी की उर्वरक क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले वर्षों में खाद्यान्न सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। किसानों से मेड़बंदी, भूमि संरक्षण, प्राकृतिक खेती, कम्पोस्ट, मल्चिंग, माइक्रो स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों को अपनाने की अपील की गई।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का पर्णीय छिड़काव मृदा को क्षति पहुंचाए बिना बेहतर उत्पादन का प्रभावी विकल्प है।राज्य कृषि मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कार्यशाला में किसानों को जीवांश कार्बन बढ़ाने के लिए कार्बनिक खाद और हरी खाद को अपनाने की सलाह दी।
कार्यशाला में बांदा और झांसी कृषि विश्वविद्यालयों ने मृदा संरक्षण पर आधारित आकर्षक मॉडल तैयार किए। मृदा परीक्षण का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसे देखकर किसान और अधिकारी उत्साहित दिखाई दिए। क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, लखनऊ मंडल ने भी स्टॉल लगाकर किसानों को जागरूक किया।
मृदा स्वास्थ्य एवं प्रबंधन विषयक प्रतियोगिता में अमन दुमका (रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी), कृष्णानंद यादव (बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय), अमन थापा (पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एएमसी बिजनौर लखनऊ), गोविंद प्रसाद रौनियार सहित कई प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
इसी प्रकार डॉ. अभिषेक कुमार, अनुत प्रोहित, डॉ. आशुतोष गुप्ता, आसिफ रियाज और निखिल यादव को उत्कृष्ट मॉडल व स्टॉल लगाने के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि रवींद्र ने कृषकों को लगातार छोटी होती कृषि जोतों, मिट्टी और जल प्रदूषण, तथा बिगड़ते मृदा स्वास्थ्य को लेकर सचेत किया। उन्होंने साफ कहा कि खेत अवशेष जलाने से मृदा की उर्वरकता और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान होता है। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग के साथ उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी।कैप्टन विकास गुप्ता ने धरती माता बचाओ अभियान के तहत किसानों से मिट्टी संरक्षण को जीवन का संकल्प बनाने की अपील की।
इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक केएन तिवारी, जवाहरलाल नेहरू अवार्डी एसके झा, नमामि गंगे के वरिष्ठ सलाहकार सीपी श्रीवास्तव, कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी, अपर कृषि निदेशक, संयुक्त कृषि निदेशक और विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रदेश के 338 प्रगतिशील किसानों और 182 तकनीकी सहायकों ने भी कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी की और मृदा स्वास्थ्य सुधार के विविध तरीकों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
