गोरखपुर। भारतीय रेलवे पर रोड ओवर ब्रिज एवं रोड अंडर ब्रिज (आरओबी/आरयूबी) निर्माण कार्यों को तीव्र गति देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार निरंतर पहल कर रही है। ट्रेन संचालन की सुरक्षा, गतिशीलता तथा सड़क उपयोगकर्ताओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए ऐसे कार्यों को चरणबद्ध ढंग से मंजूरी दी जा रही है।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2004-14 के दौरान जहां 4,148 आरओबी/आरयूबी का निर्माण हुआ था, वहीं वर्ष 2014-25 के बीच अक्टूबर 2025 तक 13,653 आरओबी/आरयूबी बन चुके हैं, जो पिछले दशक की तुलना में तीन गुना से अधिक है। मालदा डिवीजन के अजीमगंज–न्यू फरक्का खंड में किमी 239/9-10 पर एलसी संख्या 43/एसपीएल/ई के स्थान पर आरओबी निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए जीएडी व विस्तृत अनुमान तैयार करने का कार्य शुरू हो गया है।
राज्यों में विलंब के कारण कार्य प्रभावित
पश्चिम बंगाल में स्वीकृत 302 आरओबी/आरयूबी में से 99 कार्य राज्य सरकार की विभिन्न प्रक्रियागत देरी के कारण लंबित हैं। इनमें संरेखण को अंतिम रूप देने, जीएडी चरण, एलसी बंद करने की एनओसी, भूमि अधिग्रहण और कानून-व्यवस्था संबंधी मुद्दे शामिल हैं।
इसी तरह तेलंगाना में 63 स्वीकृत आरओबी में से 17 कार्य लंबित हैं, जिनमें अधिकतर भूमि अधिग्रहण की प्रतीक्षा में हैं।
कई राज्यों में तेजी से प्रगति
1 नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे पर 1,11,583 करोड़ रुपये की लागत से 4,689 आरओबी/आरयूबी स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसमें अकेले आंध्र प्रदेश में 11,686 करोड़ रुपये की लागत से 316 कार्य प्रगति पर हैं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023-24 से 2024-25 के दौरान 252 आरओबी/आरयूबी पूर्ण किए गए हैं।
महाराष्ट्र में भी 5,506 करोड़ रुपये की लागत से 275 कार्य योजना व क्रियान्वयन चरणों में हैं।
निर्माण में तेजी लाने के लिए उठाए गए कदम
रेलवे ने आरओबी/आरयूबी निर्माण गति बढ़ाने हेतु कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं—
- जीएडी तैयार करने से पहले राज्य सरकारों/सड़क प्राधिकरणों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण।
- लंबित मुद्दों के समाधान के लिए नियमित बैठकें।
- सड़क चौड़ाई, तिरछापन व डिजाइन अनुमोदन में देरी रोकने के लिए मानकीकृत सुपरस्ट्रक्चर ड्राइंग।
- जहां संभव हो, रेलवे द्वारा एकल इकाई के आधार पर कार्य क्रियान्वयन की व्यवस्था।
मंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण, उपयोगिताओं का स्थानांतरण, मौसम संबंधी परिस्थितियों तथा विभिन्न प्राधिकरणों से अनुमोदन जैसे कारक इन परियोजनाओं की गति को प्रभावित करते हैं। फिर भी रेलवे इन कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
