लाल-नीली बत्ती लगी इनोवा, 10–15 लोगों का काफिला, चार राज्यों में फैला था जालसाजी का नेटवर्क।
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खुद को आईएएस अधिकारी बताकर सरकारी रौब झाड़ने वाले एक बड़े जालसाज का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपी की पहचान गौरव कुमार सिंह उर्फ ललित किशोर के रूप में हुई है, जो स्वयं को आईएएस अफसर बताकर न सिर्फ सरकारी प्रोटोकॉल का दुरुपयोग कर रहा था, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड तक जालसाजी का नेटवर्क खड़ा कर चुका था।
IAS प्रोटोकॉल का पूरा नाटक
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को आईएएस साबित करने के लिए पूरा प्रोटोकॉल मेंटेन करता था। वह सफेद रंग की इनोवा कार पर लाल-नीली बत्ती लगाकर चलता था और उसके साथ आगे-पीछे 10 से 15 लोगों का काफिला रहता था। सिर्फ रौब-दबदबे और दिखावे पर वह हर महीने करीब 5 लाख रुपये खर्च करता था। गांव-गांव और कस्बों में दौरे कर वह खुद को जिले और राज्य स्तर का बड़ा अधिकारी बताता था, जिससे आम लोग ही नहीं, कई कारोबारी भी उसके झांसे में आ गए।
असली SDM से सामना, थप्पड़ कांड
मामला उस वक्त उजागर हुआ जब बिहार के भागलपुर जिले के एक गांव में दौरे के दौरान गौरव की मुलाकात एक असली एसडीएम से हो गई। एसडीएम द्वारा बैच और रैंक से जुड़े सवाल पूछे जाने पर आरोपी बौखला गया और कथित तौर पर एसडीएम को दो थप्पड़ मार दिए। हैरानी की बात यह रही कि इस घटना की कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई।
मोबाइल चैट से निजी जीवन का खुलासा
पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मोबाइल चैट की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार गौरव की चार गर्लफ्रेंड सामने आई हैं, जिनमें से तीन के गर्भवती होने की बात कही जा रही है। सभी महिलाएं आरोपी को आईएएस अधिकारी समझकर उसके संपर्क में थीं। इसके अलावा आरोपी ने बिहार की एक युवती से शादी भी कर रखी है।
सोशल मीडिया से बनाई फर्जी पहचान
गौरव अपने साले अभिषेक कुमार की मदद से सोशल मीडिया पर खुद को आईएएस अफसर के रूप में पेश करता था। फर्जी फोटो, अफसरों जैसी पोस्ट और वीआईपी कार्यक्रमों के वीडियो के जरिए उसने अपनी झूठी छवि मजबूत की। यूपी में नेटवर्क फैलाने के लिए उसने गोरखपुर निवासी परमानंद गुप्ता को भी अपने साथ जोड़ा, जो अभिषेक का मित्र बताया जा रहा है।
ठेके दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले तीन वर्षों में आरोपी ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में बिल्डरों व कारोबारियों को सरकारी ठेके दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम वसूली। ठगी का यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था।
पुलिस के सामने कई सवाल
फर्जी आईएएस के खुलासे के बाद पुलिस के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं— इतने लंबे समय तक आरोपी प्रशासन की नजरों से कैसे बचता रहा? लाल-नीली बत्ती और प्रोटोकॉल की अनुमति किसने दी? अब तक कितने लोगों से और कितनी रकम की ठगी की गई?
पुलिस का कहना है कि आरोपी से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
