लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ा कदम उठाते हुए परिवहन विभाग के तीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (प्रवर्तन) को निलंबित कर दिया है।
परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर लखनऊ के राजीव कुमार बंसल, रायबरेली के अंबुज तथा फतेहपुर की पुष्पांजलि मित्रा गौतम के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है।
परिवहन राज्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगी। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस संबंध में विशेष सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जनपद रायबरेली के थाना लालगंज में एसटीएफ द्वारा भारतीय न्याय संहिता 2023, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 तथा मोटरयान अधिनियम 1988 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
एसटीएफ की जांच में इन अधिकारियों की गंभीर कृत्यों और कदाचार में संलिप्तता सामने आई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इनके आचरण से न केवल सरकारी सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन हुआ है, बल्कि शासकीय राजस्व को भी क्षति पहुंची है और विभाग की छवि धूमिल हुई है।
उक्त तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर तीनों अधिकारियों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया। निलंबन अवधि के दौरान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रायबरेली अंबुज और फतेहपुर की पुष्पांजलि मित्रा गौतम की जांच उप परिवहन आयुक्त मयंक ज्योति को सौंपी गई है, जबकि लखनऊ के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी राजीव कुमार बंसल की जांच उप परिवहन आयुक्त के.डी. सिंह को सौंपी गई है।
निलंबन अवधि में तीनों अधिकारी मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे। इस अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ते के रूप में अर्द्धवेतन पर देय अवकाश वेतन के बराबर राशि प्रदान की जाएगी। शासन ने संकेत दिया है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी तथा दोष सिद्ध होने की स्थिति में आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
