लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री के जल संरक्षण के दूरगामी विजन को साकार करने की दिशा में मिशन अमृत सरोवर के अंतर्गत तेज़ी से कार्य हो रहा है। अप्रैल 2022 में शुरू हुए इस मिशन के तहत प्रदेश में अब तक 19,111 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जबकि 25,000 से अधिक स्थलों पर निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करती है।
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा गांवों में अवस्थापना सुविधाओं के व्यापक विकास के साथ सर्वांगीण ग्रामीण उन्नयन को प्राथमिकता दी जा रही है।
उप मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में परंपरा और विज्ञान के समन्वय से उन तालाबों और जलभराव क्षेत्रों का पुनरुद्धार किया जा रहा है, जो वर्षों से उपेक्षा, अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार रहे थे। समय-समय पर दिए गए निर्देशों के तहत निर्माण कार्यों को गति दी गई है, ताकि जल संकट, गिरते भू-जल स्तर और अनिश्चित मानसून जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
अमृत सरोवर का निर्माण न्यूनतम एक एकड़ क्षेत्रफल में किया जा रहा है, जिनमें लगभग 10,000 क्यूबिक मीटर जल धारण की क्षमता विकसित की जाती है। पुराने तालाबों और प्राकृतिक जलभराव क्षेत्रों को वैज्ञानिक ढलान, सुदृढ़ तटबंध और वर्षा जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक जल संरक्षण संभव हो सके।
सरोवरों के चारों ओर नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन जैसे औषधीय, फलदार और छायादार स्थानीय वृक्षों की हरित पट्टी विकसित की जा रही है। इससे पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव पर प्रभावी नियंत्रण और मृदा संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।
अमृत सरोवरों का सकारात्मक प्रभाव अब गांवों के दैनिक जीवन में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। भू-जल स्तर में सुधार आया है, सिंचाई सुविधाएं बेहतर होने से कृषि उत्पादन में स्थिरता बढ़ी है और पशुपालन व मछली पालन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो रही है। निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिला है, जबकि ग्राम सभाओं की निगरानी से ये सरोवर सामुदायिक संपत्ति के रूप में विकसित हो रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के दौर में अमृत सरोवर हीटवेव, सूखा और अनियमित वर्षा जैसी परिस्थितियों में प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में उभर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में न्यूनतम दो अमृत सरोवर विकसित कर भविष्य के लिए जल संरक्षण की मजबूत व्यवस्था खड़ी करना है। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में अमृत सरोवर एक दीर्घकालिक और स्थायी समाधान के रूप में स्थापित हो रहे हैं।
