•मेला प्रशासन ने दी सफाई- किसी को स्नान करने से रोका नहीं।
प्रयागराज। मौनी अमावस्या पर संगम नोज पर हुए विवाद को लेकर रविवार को प्रयागराज के पुलिस, प्रशासनिक अफसरों ने विस्तार से अपनी बात रखी। मेला प्राधिकरण कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि स्नान से किसी को नहीं रोका गया और यह महज भ्रम फैलाया गया। जो भी किया गया, वह नियमों के मुताबिक व करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया। यह भी स्पष्ट किया कि जो भी स्नान करना चाहता है, वह आए लेकिन जो व्यवस्था बनाई गई है, उसका पालन करना होगा।
अफसरों ने कहा है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूर्व में कोई सूचना नहीं दी थी। एक दिन पहले उन्होंने दो वाहनों की अनुमति, सुरक्षा व व्यवस्था की डिमांड की थी, जिस पर उनको स्पष्ट रूप से मना कर दिया गया था। कि यह स्नान पर्व है इसमें कोई प्रोटोकॉल किसी को उपलब्ध नहीं कराया जाता। बावजूद इसके त्रिवेणी पीपा पुल, जिसे इमरजेंसी स्थिति के लिए ओपेन होता है, उस पर सैकड़ों अनुयायियों के साथ आए और बैरियर तोड़ दिया। वहां पर उनसे अनुरोध किया गया।
बताया गया कि यह वह समय था जब संगम नोज पर सबसे अधिक श्रद्धालु मौजूद थे इसके बावजूद वह नहीं माने। संगम नोज पर पहुंचने पर भी उनके समर्थकों की ओर से बैरियर तोड़ा गया। इस पर भी सभी अफसरों ने उनसे अनुरोध किया, इसके बावजूद वह नहीं माने और वापस चले गए। किसी को स्नान से नहीं रोका गया, सिर्फ यह कहा गया कि व्यवस्था बनाई गई है और इसका पालन करें ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
पुलिस कमिश्नर जोगेंदर कुमार ने बताया कि सुबह नौ से 10 का समय पीक टाइम था। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती थी। यही एकमात्र कारण था उनको रोकने का। जहां तक बैरिकेडिंग तोड़ने की बात है तो सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। इसके अलावा कुछ विजुअल्स भी सामने आए हैं, जिसमें पुलिसकर्मियों के कार्य में बाधा पहुंचाई गई। इन सभी साक्ष्यों का अवलोकन किया जा रहा है, इसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि 14 अक्टूबर 2022 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश है जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने से रिस्ट्रेन किया गया है। तब से लेकर अब तक मेला प्रशासन या मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी जी को शंकराचार्य का प्रोटोकॉल नहीं दिया गया है। चाहे वह भूमि आवंटन हो या सुविधा हो, क्योंकि अगर ऐसा मेला प्रशासन करता है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगा। अफसरों के तमाम बार अनुनय- विनय करने के बाद भी लगातार वापसी मार्ग को तीन घंटे तक, जबकि उस समय तक संगम नोज पर सर्वाधिक क्राउड डेंसिटी थी, बाधित किए रखा गया।
इस दौरान 100 से अधिक जवानों को, उच्चाधिकारियों को लगाना पड़ा। वाहन की परमिशन उनकी ओर से मांगी गई थी, लेकिन ऐसी कोई परंपरा न होने के कारण ऐसा कोई परमिशन नहीं दिया गया। ऐसे में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं है।
अफसरों ने कहा कि इस दौरान कई संत आए और आम श्रद्धालु की तरह स्नान करके चले गए। किसी को स्नान से नहीं रोका गया है, ना ही रोका जाएगा। सिर्फ यही है कि जो व्यवस्था बनाई गई है, उसका पालन किया जाए।
डीएम बोले- मामला कोर्ट में विचाराधीन
प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जो भी डीसीजन होगा वह सभी के लिए बाध्यकारी है।
