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रायबरेली। ग्लूकोमा जागरूकता माह के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स)मुंशीगंज के नेत्र रोग विभाग द्वारा एक सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की थीम साइलेंट थीफ ऑफ साइट: नो ग्लूकोमा, सेव विज़न रही। यह शैक्षणिक कार्यक्रम नेत्र रोग विभाग के सेमिनार कक्ष में संपन्न हुई।
एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ग्लूकोमा के शीघ्र निदान एवं समय पर उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना था, जो विश्वभर में अपरिवर्तनीय अंधत्व के प्रमुख कारणों में से एक है।इस मौके पर उपस्थित सभी अतिथियों ने सीएमई के सफल आयोजन की सराहना करते हुए ग्लूकोमा जैसी दृष्टिहीनता उत्पन्न करने वाली बीमारी की रोकथाम हेतु जागरूकता एवं शैक्षणिक गतिविधियों के महत्व पर बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. श्रृंखल द्वारा स्वागत संबोधन एवं विषय परिचय से हुई। इसके पश्चात प्रो. (डॉ.) प्रगति गर्ग, आयोजन अध्यक्ष एवं डीन (परीक्षा) ने “अर्ली ग्लूकोमा, अर्ली एक्शन: चेंजिंग द नैचुरल हिस्ट्री” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अंतिम वैज्ञानिक सत्र में डॉ. एसके भास्कर ने “ग्लूकोमा में अंतःनेत्र दाब एवं अन्य दाब” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. रुचि शुक्ला द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस सीएमई में फैकल्टी सदस्यों, रेज़िडेंट डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम में कर्नल अखिलेश सिंह (उप निदेशक–प्रशासन), डॉ. अर्चना वर्मा (डीन–रिसर्च), कर्नल यू. एन. राय (वित्त सलाहकार), एम्स रायबरेली की गरिमामयी उपस्थिति रही।
