•माघ मेले में शंकराचार्य ने ध्वजारोहण किया, लोगों को दिलाया गोरक्षा का संकल्प
|बरेली सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे से शंकराचार्य दुःखी
प्रयागराज। माघ मेले में गणतंत्र दिवस के अवसर पर गंगा तिरंगा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान ध्वजारोहण करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देश, धर्म, संस्कृति और गौ-रक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत और तीखा वक्तव्य दिया। धरने पर बैठे शंकराचार्य ने ध्वाजारोहण किया और गौ रक्षा यात्रा पर निकल गए। वापस लौटने पर साधु संतों, अनुयायियों से मिले। राजनीतिक दलों के नेता भी उनसे मिले आए। इस बीच बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे की बात सुन शंकराचार्य दुःखी हो गए। कहा कि मुझे तो बहुत पीड़ा है, सोचिये सिटी मजिस्ट्रेट को कितनी पीड़ा हुई है।
शंकराचार्य ने कहा कि गंगा तिरंगा कार्यक्रम देश का एकमात्र ऐसा आयोजन है, जिसमें राष्ट्रध्वज और राष्ट्र नदी, दोनों का एक साथ वंदन होता है। उन्होंने कहा कि भारत 77 वर्षों से गणतंत्र है और हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है, लेकिन आज भी अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि 26 जनवरी की तिथि ही क्यों चुनी गई। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था, लेकिन उस समय संविधान का निर्माण चल रहा था। संविधान के पूर्ण होने के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र घोषित किया गया। यह तिथि संयोगवश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति को ध्यान में रखकर चुनी गई थी।
शंकराचार्य के अनुसार, विद्वानों ने माना कि भीष्म अष्टमी जैसे पावन अवसर से जुड़ा दिन गणतंत्र की घोषणा के लिए सर्वोत्तम है, क्योंकि भीष्म पितामह राष्ट्र, धर्म और मर्यादा के प्रतीक थे। शंकराचार्य ने चिंता जताते हुए कहा कि आज भारतीय तिथियों और परंपराओं को भुला दिया गया है। अंग्रेजी मानसिकता के कारण भारतीय समाज अपनी ही संस्कृति से दूर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बहुत कम लोग जानते हैं कि भीष्म अष्टमी का क्या महत्व है।
उन्होंने कहा कि भारत से भारतीयता धीरे-धीरे समाप्त की जा रही है। न भाषा बची है, न भाव, और न ही पूर्वज विद्वानों के प्रति सम्मान। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन परंपरा के अनुसार जीवन जीने वालों पर लगातार प्रहार हो रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि शंकराचार्य, दंडी स्वामी, ब्रह्मचारी, महिलाएं और वृद्ध सभी इस व्यवस्था के शिकार बन रहे हैं और धर्म के पक्ष में खड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ-रक्षा को हिंदू धर्म का मूल बताते हुए कहा कि हिंदू की पहचान उसका गोत्र है, जिसका अर्थ है- गौ की रक्षा करने वाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पहली रोटी गौ माता के लिए बनती है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आज गौ-हत्या और गोमांस व्यापार खुलेआम हो रहा है। हिंदुओं के वोट से बनी सरकारों के संरक्षण में यह सब जारी है और भारत आज गोमांस निर्यात करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
शंकराचार्य ने कहा कि आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय की नहीं, बल्कि नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध एक ही परिवार के भीतर हुआ था, जहां एक पक्ष अन्याय के साथ सत्ता में था और दूसरा पक्ष धर्म के साथ, संसाधनविहीन होकर भी श्रीकृष्ण के साथ खड़ा था।
शंकराचार्य ने कहा कि गीता सिखाती है कि विजय सदैव धर्म की होती है। संसाधन कम हों, लेकिन सत्य, धर्म और ईश्वर का आशीर्वाद साथ हो, तो विजय निश्चित है।
