रिपोर्ट: पवन कुमार रस्तोगी।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु के एक मामले में आरोपी पति को जमानत प्रदान की है। न्यायालय ने यह आदेश मामले के तथ्यों, एफआईआर में देरी, मेडिकल साक्ष्यों और आरोपी के आपराधिक इतिहास के अभाव को देखते हुए दिया।
मामला जनपद जौनपुर के जलालपुर थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी जितेंद्र उर्फ संदीप के विरुद्ध वर्ष 2025 में दहेज मृत्यु के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार, विवाह के लगभग छह वर्ष बाद महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। पुलिस ने मामले में धारा 85, 80(2) भारतीय न्याय संहिता (पूर्व में 304-बी आईपीसी) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से विद्वान अधिवक्ता कुलदीप कुमार गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि मृतका की मृत्यु ज़हर सेवन के कारण हुई है तथा पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट में आत्महत्या की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के लगभग 40 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जिसकी कोई संतोषजनक व्याख्या अभियोजन द्वारा नहीं दी जा सकी।
अधिवक्ता कुलदीप कुमार गुप्ता ने यह भी दलील दी कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह घटना के वक्त वहां मौजूद नहीं था। उन्होंने ज़मानत दिए जाने का आग्रह किया।
वहीं, सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध किया, हालांकि वह एफआईआर में देरी तथा मृत्यु के कारण को लेकर मेडिकल रिपोर्ट में दर्शाए गए तथ्यों का स्पष्ट खंडन नहीं कर सका।
मामले की सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने कहा कि एफआईआर में अत्यधिक देरी, चिकित्सा साक्ष्यों में आत्महत्या की संभावना तथा अपराधिक इतिहास का न होना जमानत के लिए महत्वपूर्ण आधार है न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की जा रही है।
अदालत ने आरोपी को व्यक्तिगत मुचलका एवं दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही यह शर्त रखी गई कि आरोपी मुकदमे के दौरान न्यायालय में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा तथा किसी भी आपराधिक गतिविधि में संलिप्त नहीं होगा।
