नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में आवारा कुत्तों की समस्या से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वकीलों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नसबंदी (एनीमल बर्थ कंट्रोल) के आंकड़ों में फर्जीवाड़े और फंड की हेराफेरी की ओर इशारों में कड़ी टिप्पणी की।
हाईवे पर जानवरों की फोटो अपलोड करने के लिए बनेगा ऐप
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। पीठ ने कहा कि हाईवे पर आवारा जानवरों की मौजूदगी सड़क हादसों का कारण बनती है, इसलिए NHAI को एक ऐसा मोबाइल ऐप बनाना चाहिए, जिस पर आम लोग हाईवे पर जानवर दिखने पर उसकी फोटो खींचकर अपलोड कर सकें। इससे विभाग को लोकेशन सहित तस्वीरें मिलेंगी और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। कोर्ट के इस सुझाव पर NHAI के वकील ने सहमति जताई।
सिर्फ 76 सेंटर मान्य, लेकिन राज्यों के कागजों में 883 केंद्र
सुनवाई के अंतिम चरण में एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (Animal Welfare Board of India) के वकील ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि देश में बोर्ड से मान्यता प्राप्त नसबंदी केंद्रों की संख्या केवल 76 है, जबकि राज्यों के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि 883 सेंटर संचालित हो रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि सैकड़ों केंद्र या तो बिना मान्यता के चल रहे हैं या फिर केवल कागजों पर ही मौजूद हैं। वकील ने यह भी बताया कि 250 से अधिक आवेदन अभी लंबित हैं।
कुत्ते कम, नसबंदी ज्यादा? कोर्ट ने फंड की धांधली पर कसा तंज
आंकड़ों में विसंगति का हवाला देते हुए वकील ने उत्तराखंड का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि वहां कुत्तों की आबादी कम है, लेकिन नसबंदी के आंकड़े कुत्तों की अनुमानित संख्या से भी अधिक दर्शाए गए हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसके कारण बिल्कुल स्पष्ट हैं। हर कोई जानता है कि इसके पीछे क्या वजह है। जब वकील ने कहा कि इस विषय पर जितना कम कहा जाए, उतना बेहतर है, तो पीठ ने भी सहमति जताई।
अस्पष्ट हलफनामों पर राज्यों को फटकार
इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों द्वारा दायर किए गए अस्पष्ट और अधूरे हलफनामों पर नाराजगी जताई थी। मौजूदा सुनवाई में कुत्ता पालने वालों, डॉग बाइट के पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं तथा केंद्र व राज्य सरकारों के वकीलों ने अपने-अपने पक्ष रखे। अंत में कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि लंबित आवेदनों को एक तय समय सीमा में निपटाया जाए या तो उन्हें मंजूरी दी जाए या अस्वीकृत किया जाए, लेकिन अनावश्यक रूप से लटकाया न जाए।
