सुलतानपुर। के.एन.आई, संस्कृत विभाग द्वारा छात्रों के शैक्षणिक एवं बौद्धिक विकास के उद्देश्य से दिन शनिवार को छात्र संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी बाणभट्ट का जीवन और साहित्यिक योगदान विषय पर रहा। संगोष्ठी की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष वंदना सिंह ने की। मुख्य वक्ता के रूप में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सर्वेश कुमार उपस्थित रहे।
डॉ. सर्वेश कुमार ने अपने संबोधन में संस्कृत गद्य परंपरा के महान आचार्य बाणभट्ट के जीवन व्यक्तित्व एवं साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाणभट्ट को संस्कृत गद्य का अप्रतिम शिल्पकार बताया। बाणभट्ट की हर्षचरित ऐतिहासिक संस्कृत गद्य की उत्कृष्ट कृति तथा कादम्बरी संस्कृत कथा-साहित्य का शिखर ग्रंथ है।
इन्होंने बताया कि बाणभट्ट ने अलंकार-प्रधान भाषा-शैली सूक्ष्म भावाभिव्यक्ति सजीव प्रकृति-चित्रण एवं आत्मकथात्मक प्रवृत्ति पर विशेष बल दिया। संगोष्ठी के दौरान बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा मरियम खान ने बाणभट्ट के साहित्य में निहित सांस्कृतिक चेतना सामाजिक दृष्टि एवं साहित्यिक नवीनता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर जूली मरियम खान अभिषेक कपिल शिवांगी व मुस्कान आदि अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता की।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वंदना सिंह ने कहा कि बाणभट्ट का साहित्य संस्कृत गद्य परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जो विद्यार्थियों को शास्त्रीय साहित्य के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
