लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सम्मेलन पुलिस मंथन-2025 में प्राप्त संस्तुतियों के क्रम में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा थाना पैरोकार एवं कोर्ट मोहर्रिर की कार्यकुशलता और दक्षता में वृद्धि के उद्देश्य से एक अर्ध दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला दिनांक 01 फरवरी 2026 को प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक संगोष्ठी सदन, रिजर्व पुलिस लाइन्स, कमिश्नरेट लखनऊ में संपन्न हुई।
कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. बी.डी. पॉल्सन, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण, पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय उत्तर प्रदेश द्वारा की गई।कार्यशाला में कमिश्नरेट लखनऊ के अंतर्गत आने वाले 54 थानों से कुल 87 थाना पैरोकार एवं 124 कोर्ट मोहर्रिर ने प्रतिभाग किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली में थाना पैरोकार और कोर्ट मोहर्रिर की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाना, न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाना तथा नए कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्य प्रणाली को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम में कोर्स निदेशक के रूप में देव रंजन वर्मा, पुलिस उपमहानिरीक्षक, प्रशिक्षण उपस्थित रहे, जबकि सहयोगी अधिकारी के रूप में ऋजुल, अपर पुलिस अधीक्षक प्रशिक्षण, पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय उत्तर प्रदेश लखनऊ ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यशाला के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा विषयगत व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
आपराधिक न्याय प्रणाली में थाना पैरोकार एवं कोर्ट मोहर्रिर की भूमिका पर संयुक्त निदेशक, अभियोजन निदेशालय रामेन्द्र मोहन मिश्रा द्वारा विस्तृत व्याख्यान दिया गया, जिसमें अभियोजन की प्रक्रिया, केस डायरी, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन समन्वय पर विशेष प्रकाश डाला गया।
तीन नए आपराधिक कानूनों के परिप्रेक्ष्य में थाना पैरोकार और कोर्ट मोहर्रिर के उत्तरदायित्व, महत्वपूर्ण अवधारणाएं तथा तकनीकी नवाचार विषय पर संयुक्त निदेशक, प्रशिक्षण निदेशालय के.के. शुक्ल द्वारा व्याख्यान दिया गया। उन्होंने नए कानूनों के तहत कार्य प्रणाली में आए बदलावों, डिजिटल प्रक्रिया, समयबद्ध कार्यवाही और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित किया।
वहीं थाना पैरोकार और कोर्ट मोहर्रिर से अपेक्षाएं विषय पर सेवानिवृत्त निरीक्षक अभिमन्यु धर द्विवेदी द्वारा व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
व्याख्यान सत्रों के उपरांत प्रतिभागी थाना पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों से विषयवार फीडबैक भी प्राप्त किया गया, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और भविष्य की कार्ययोजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने में थाना पैरोकार और कोर्ट मोहर्रिर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनकी दक्षता से ही विवेचनाओं की गुणवत्ता तथा मामलों के त्वरित निस्तारण को सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यशाला सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारियों को अपने दैनिक कार्य में लागू करने का संकल्प व्यक्त किया।
