रिपोर्ट: पवन कुमार रस्तोगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) में न्यूनतम कटऑफ (न्यूनतम परसेंटाइल) निर्धारित किए जाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एवं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को मांग-पत्र सौंपा।
मांग-पत्र में प्रतिनिधि मंडल ने अवगत कराया कि पीईटी परीक्षा एक ऐसी एकमात्र प्रारंभिक परीक्षा है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, जूनियर असिस्टेंट, लोअर पीसीएस समेत विभिन्न विभागों की भर्तियां होती हैं। यदि किसी अभ्यर्थी का पीईटी में किसी कारणवश प्रदर्शन खराब हो जाता है, तो उसे कई परीक्षाओं से वंचित होना पड़ता है, जिससे उसके भविष्य पर गंभीर असर पड़ता है।
अभ्यर्थियों ने ज्ञापन में कहा कि वर्तमान में पीईटी परीक्षा में न्यूनतम कटऑफ निर्धारित न होने के कारण अनेक योग्य अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में बैठने का अवसर ही नहीं मिल पाता, जिससे वे खुली प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं। यह स्थिति न केवल मानसिक तनाव बढ़ाती है, बल्कि अभ्यर्थियों के समय और आर्थिक संसाधनों की भी बर्बादी करती है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि सीटीईटी, यूपीटीईटी, सीसैट और नीट-पीजी 2025 की तर्ज पर पीईटी परीक्षा में भी न्यूनतम कटऑफ लागू किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने माननीय मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम से आग्रह किया कि पीईटी 2025 एवं आगामी परीक्षाओं में न्यूनतम कटऑफ लागू कर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को राहत प्रदान की जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में अनुपम सिंह, मोनू पांडे, पंकज पांडेय, अखिल गुप्ता, अमन यादव, हर्ष झा, खुशबू त्रिपाठी सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे।
