न्यूयॉर्क। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तनाव और गहरा गया है। हाल ही में ट्रंप द्वारा पेट्रो को अपनी सुरक्षा को लेकर दी गई चेतावनी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी साफ नजर आने लगी है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की गई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क लाए जाने की खबरें सामने आईं।
डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि कोलंबिया में कोकीन का निर्माण हो रहा है और उसे अमेरिका भेजा जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि पेट्रो को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि, पेट्रो ने ट्रंप का नाम लिए बिना अमेरिकी कार्रवाई को लैटिन अमेरिका की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया और चेतावनी दी कि इससे पूरे क्षेत्र में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है।
ड्रग तस्करी और सैन्य तैनाती पर टकराव
गुस्तावो पेट्रो पहले भी कैरिबियन क्षेत्र में ड्रग तस्करी के नाम पर अमेरिकी सैन्य तैनाती के कड़े आलोचक रहे हैं। ट्रंप द्वारा कोलंबिया में ड्रग लैब्स पर संभावित हमले के संकेत को पेट्रो ने आक्रमण की धमकी करार दिया था। दोनों नेताओं के बीच मतभेद मुख्य रूप से ड्रग तस्करी, अवैध प्रवासन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हैं।
2025 से चला आ रहा है विवाद
इस तनाव की शुरुआत वर्ष 2025 में उस समय हुई थी, जब कोलंबिया ने निर्वासित प्रवासियों को वापस लेने से इनकार कर दिया था और पेट्रो ने अमेरिकी सैन्य विमानों को उतरने की अनुमति नहीं दी थी। इसके जवाब में ट्रंप ने कोलंबिया पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी।
‘ड्रग लीडर’ कहे जाने से बिगड़े रिश्ते
रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रग्स के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन ने कोलंबिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सहायता रोक दी थी और पेट्रो को ‘ड्रग लीडर’ तक कहा गया था। अब वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की कड़ी बयानबाजी और पेट्रो के संप्रभुता व मानवाधिकारों पर जोर देने से दोनों देशों के संबंधों में गंभीर दरार पड़ चुकी है। इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका में अमेरिका की भूमिका और प्रभाव पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस टकराव की दिशा क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
