•कहा- नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे।
के.के. मिश्रा, संवाददाता।
संत कबीर नगर। सदर विधायक अंकुर राज तिवारी ने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हर भारतीय के स्वाभिमान और आत्मविश्वास का प्रतीक है।” वे भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसका आयोजन जिला अध्यक्ष नीतू सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विधायक तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत नित नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। आत्मनिर्भर भारत अभियान का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक में यह भावना जागृत करना है कि “मैं अपने देश की ताकत हूँ।”
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है “खुद पर विश्वास रखना, अपने दम पर आगे बढ़ना और दूसरों को भी सशक्त बनाना।” यह किसी पर निर्भर रहने की सोच नहीं, बल्कि खुद को इतना सक्षम बनाने की भावना है कि हम दूसरों की मदद कर सकें।
विधायक ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने यह साबित कर दिया कि जब भारत ठान लेता है, तो किसी भी चुनौती से पार पा सकता है। हमने अपने दम पर वैक्सीन बनाई, ज़रूरतमंदों तक पहुँचाई और पूरी दुनिया की मदद की। यह केवल आत्मनिर्भर भारत की नीति नहीं, बल्कि 125 करोड़ देशवासियों की एकजुटता का परिणाम था।
उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के पाँच मज़बूत स्तंभ – अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, प्रणाली, जनशक्ति और माँग’ नए भारत की नींव हैं। “वोकल फॉर लोकल” अभियान केवल आर्थिक पहल नहीं है, बल्कि स्वाभिमान का आंदोलन है। जब हम स्थानीय उत्पादों को अपनाते हैं, तो अपने गाँव, क्षेत्र और छोटे उद्योगों को सशक्त बनाते हैं।
विधायक तिवारी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का वास्तविक चेहरा वही है, जहाँ हर बेटी और हर महिला आर्थिक रूप से मज़बूत, आत्मविश्वासी और सम्मानित महसूस करे। महिलाओं का सशक्तिकरण ही राष्ट्र की असली ताकत है।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और इसका श्रेय हमारी मेहनत, सोच और आत्मविश्वास को जाता है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि
“हम नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे।”
समापन में विधायक अंकुर राज तिवारी ने कहा कि
“आत्मनिर्भर भारत कोई सपना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य का वादा है। आइए मिलकर ऐसा भारत बनाएं जो आत्मनिर्भर और आत्मगौरव से परिपूर्ण हो।” जय आत्मनिर्भर भारत।
