-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन, आवास, यातायात और नगरीय सुविधाओं में ऐतिहासिक प्रगति।
-वैश्विक धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में अयोध्या को स्थापित करने के लिए आधारभूत ढांचे के सशक्त विकास पर फोकस।
अयोध्या। आस्था और विकास की अनूठी यात्रा में अयोध्या ने एक नया इतिहास रच दिया। विकास के दृष्टिकोण से वर्ष 2025 बेहद शानदार रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में रामनगरी वैश्विक धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में उभरकर सामने आई। राम मंदिर के भव्य निर्माण के साथ ही आधारभूत ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव आए, जिसने अयोध्या को विश्वस्तरीय तीर्थ नगरी का दर्जा दिलाया है।
सरयू तट का सौंदर्यीकरण, रिवरफ्रंट विकास, घाटों का जीर्णोद्धार और आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था ने नदी तट को पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है। चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर, नया रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और बेहतर यातायात नेटवर्क ने आने-जाने को सुगम बनाया है। सर्किट हाउस, गेस्ट हाउस और नाइट स्टे सुविधाओं के विस्तार से पर्यटकों को आरामदायक आवास मिल रहा है।
आज अयोध्या न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि विकास, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक भी बन चुकी है। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद सरकार के नेतृत्व में यहां दर्जनों विकास परियोजनाएं पूरी हुईं या अंतिम चरण में हैं, जो पर्यटन, स्वास्थ्य, यातायात, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत बना रही हैं। ये सभी प्रोजेक्ट अयोध्या में ही लागू हुए हैं और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला कारागार के पीछे 8.5 करोड़ रुपये की लागत से 14,000 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक ओपन सरफेस पार्किंग बनाई गई है। यह सुविधा 48 बड़े वाहन, 150 से अधिक चार पहिया वाहन और बड़ी संख्या में दोपहिया वाहनों को समायोजित कर सकती है। यहां इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन, सीसीटीवी, उचित प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
जेल की दीवारों पर रामायण दृश्यों की पेंटिंग्स इसे आकर्षक बनाती हैं, जो सेल्फी पॉइंट भी बन गई हैं। इससे ट्रैफिक जाम में कमी आई है और श्रद्धालुओं को सुगम पहुंच मिली है।
अयोध्या में रामायण कथा पर आधारित दुनिया का पहला वैक्स म्यूजियम तैयार हो चुका है, जिस पर लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 10,000 स्क्वायर फीट में फैला यह म्यूजियम राम-रावण युद्ध, सीता हरण, हनुमान की लंका यात्रा और राम सेतु निर्माण जैसे प्रसंगों को वैक्स मूर्तियों, ऑडियो-विजुअल इफेक्ट्स और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से जीवंत करता है। परिक्रमा पथ पर स्थित यह म्यूजियम पर्यटन को नया आयाम देगा और बच्चों-युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
दर्शननगर स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में 110 बेड क्षमता वाला ट्रॉमा सेंटर लगभग 33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो चुका है। इससे गंभीर दुर्घटना और आपातकालीन मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा तथा लखनऊ पर निर्भरता कम होगी। यह योगी सरकार की स्वास्थ्य प्राथमिकता का सशक्त उदाहरण है। 14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस भवन में 300 पुलिसकर्मियों के लिए आधुनिक आवासीय सुविधा उपलब्ध है। इससे कानून-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
सरयू नदी पर निर्मित यह फ्लोटिंग रेस्टोरेंट श्रद्धालुओं और पर्यटकों को नदी के मनोरम दृश्य के साथ भोजन का नया अनुभव देगा। पर्यावरण अनुकूल डिजाइन के साथ यह परियोजना अयोध्या को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त बनाएगी। 2.5 किमी क्षेत्र में 23.46 करोड़ रुपये की लागत से 32 पत्थर छतरियां, 11 स्तंभ, पूजा स्थल, गौ-पूजा स्थल, दिशा सूचक, इंटरप्रिटेशन वॉल और वीआईपी पवेलियन का निर्माण किया गया है, जिससे सरयू घाटों को नया स्वरूप मिला है। इसके साथ ही बृहस्पति कुंड का सौंदर्यीकरण 4.49 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों की मूर्तियां विशेष आकर्षण हैं।
महत्वपूर्ण विकास कार्य
33 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, मांझा जमथरा -221 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एसटीपी 15 नालों के गंदे पानी को शोधित करेगा।
सीपेट पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग संस्थान-गंजा में 40 करोड़ रुपये की लागत से बने सीपेट संस्थान से तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
गोसाईगंज फोर लेन बाईपास- 114 करोड़ रुपये की लागत से 5.5 किमी लंबा फोर लेन बाईपास निर्माणाधीन है, जिससे ट्रैफिक सुगम होगा।
कृषि विश्वविद्यालय में नई सड़कें-10.96 करोड़ रुपये से परिसर में 9 किमी नई सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे आवागमन सुविधाजनक हुआ।
एनएच-27 अयोध्या बाईपास अंडरपास-21 करोड़ रुपये की लागत से बने वाहन अंडरपास से यातायात और अधिक सुचारु हुआ है।
