लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को पशुपालन निदेशालय में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 14 जनपदों में स्थापित 18 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों का वर्चुअल लोकार्पण किया।
इन केन्द्रों के निर्माण से गोवंश संरक्षण की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि इन 18 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों में मिर्जापुर जनपद में तीन, बरेली और कानपुर देहात में दो-दो तथा आजमगढ़, कासगंज, उन्नाव, बुलन्दशहर, श्रावस्ती, अम्बेडकरनगर, बाराबंकी, सुलतानपुर, फिरोजाबाद, रायबरेली और बदायूं में एक-एक केन्द्र का शत-प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन सभी केन्द्रों की कुल निर्माण लागत 28 करोड़ 82 लाख रुपये है और प्रत्येक केन्द्र में लगभग 400 गोवंश के संरक्षण की क्षमता विकसित की गई है।
इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशन में प्रदेश सरकार गोवंश के भरण-पोषण, संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। गोआश्रय स्थलों और वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के निर्माण में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि निराश्रित गोवंश को सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त चारा, भूसा, प्रकाश और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गोशालाओं में किसी भी स्थिति में गाय भूखी न रहे।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने संबंधित जनपदों के ग्राम प्रधानों, मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों और केयरटेकरों से संवाद करते हुए गोवंश के रखरखाव और स्थानीय सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गो संरक्षण के कार्यों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा केन्द्रों के संचालन और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
मंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 630 वृहद गो संरक्षण केन्द्रों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनके सापेक्ष 421 केन्द्रों का निर्माण पूर्ण हो चुका है और 410 केन्द्र क्रियाशील किए जा चुके हैं। प्रत्येक वृहद गो संरक्षण केन्द्र की गोवंश धारण क्षमता 400 है तथा प्रति इकाई निर्माण लागत 160.12 लाख रुपये निर्धारित की गई है। प्रदेश में 0.5 हेक्टेयर भूमि पर स्थायी गोआश्रय स्थल बनाए जाने का निर्णय भी लिया गया है। निराश्रित गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा अभूतपूर्व और उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण हेतु शत-प्रतिशत अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से दिसंबर 2025 तक किया जा चुका है। गो संरक्षण कार्यक्रमों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक उन्नति के नए अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।
वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6503 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 421 वृहद गो संरक्षण केन्द्र और 259 कांजी हाउस, जबकि शहरी क्षेत्रों में 314 कान्हा गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इन कुल 7497 गो आश्रय स्थलों में 12 लाख 38 हजार 447 निराश्रित गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत 1 लाख 13 हजार 631 इच्छुक लाभार्थियों को 1 लाख 81 हजार 418 निराश्रित गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। सहभागिता योजना और गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के भरण-पोषण पर प्रतिदिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान पशुधन विभाग द्वारा 22 जनवरी से 8 मार्च 2026 तक संचालित होने वाले राष्ट्रीय खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण अभियान के सातवें चरण 2025-26 का भी शुभारम्भ किया गया। मंत्री ने कहा कि पशुपालन विभाग गो आश्रय स्थलों को स्वावलंबी बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रहा है। गोबर से गो-दीप, धूपबत्ती, गो-लॉग, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट और सीबीजी उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिनके संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए स्रोत विकसित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में पशुधन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गो संरक्षण केन्द्रों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं और अधिकारी नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और गोवंश संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर विशेष सचिव पशुधन देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, निदेशक प्रशासन एवं विकास मेमपाल सिंह, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र राजेन्द्र प्रसाद, अपर निदेशक संगीता तिवारी, योजनाधिकारी पी.के. सिंह, संयुक्त निदेशक मुख्यालय सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
