लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर बहुजन समाज पार्टी ने आज पूरे देश में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली और विभिन्न राज्यों तक आयोजित इन कार्यक्रमों में भारी संख्या में अनुयायी पहुंचे और बाबा साहेब को नमन किया। बीएसपी प्रमुख मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देशभर में जुटी भीड़ और कर्मठ कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताया।

मायावती ने इस अवसर पर कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी यह प्रश्न आम जनमानस के बीच गूंज रहा है कि संविधान के मानवतावादी और कल्याणकारी उद्देश्यों के अनुरूप बहुजन समाज को आत्मसम्मान और स्वाभिमान भरे ‘अच्छे दिन’ आखिर कब नसीब होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी पार्टियों के शासन में बहुजन समाज के हितों और उनकी वास्तविक समस्याओं को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई, जिसके कारण आज भी समाज का बड़ा वर्ग अपने अधिकारों से वंचित है।
बीएसपी प्रमुख ने कहा कि बहुजन समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और सत्ता में भागीदारी के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है, जबकि विपक्षी राजनीतिक दल इस संघर्ष को बाधित करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मताधिकार की रक्षा के लिए चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में सक्रियता से भाग लें, ताकि कोई भी बहुजन मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।
लखनऊ के ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल’ और नोएडा के ‘राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल’ पर आज सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धांजलि समारोहों में बाबा साहेब को याद करते हुए लोग उनके चित्रों और प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाते रहे।
नोएडा में आयोजित कार्यक्रम में बीएसपी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी पहुंचे और लोगों के साथ बाबासाहेब के विचारों पर प्रेरक संवाद साझा किया। देश के अन्य राज्यों में भी जोन स्तरीय कार्यक्रमों के माध्यम से अम्बेडकर की विरासत, संघर्ष और राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।
मायावती ने अपने शासनकाल में बहुजन महापुरुषों की सम्मानित स्मृतियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाए गए स्मारकों, पार्कों, जिलों, संस्थानों और योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये वे ऐतिहासिक कार्य हैं जिन्हें जातिवादी सरकारों ने सदैव हाशिए पर रखा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रुपए के लगातार अवमूल्यन ने आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है, जो अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सरकार को इसे गंभीरता से लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब को याद करना तभी सार्थक है, जब समाज और सरकारें उनके मूलभूत संवैधानिक आदर्शों—समता, न्याय और मानवता—का पालन करें। मौजूदा परिस्थितियों में अम्बेडकर के विचारों और उनकी दिखाई राह पर चलना ही देश के बहुजन समाज और भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए सबसे अनिवार्य आवश्यकता है।
