•पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक तिथि पर शिष्यों ने किया भव्य स्वागत
•बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलबीर गिरी ने संगम नोज पर किया शंकराचार्य का स्वागत अभिनंदन
प्रयागराज। गोवर्धन मठ पुरी ओड़ीसा के 145 वें शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक तिथि बसंत पंचमी पर उनका भव्य स्वागत अभिनन्दन किया गया। माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर 4 त्रिवेणी मार्ग स्थित पुरी शंकराचार्य शिविर में बड़ी संख्या में देश प्रदेश व विदेश से आए शिष्य गणों ने शंकराचार्य से आशीर्वाद लेते हुए उनसे धर्म आध्यात्म व राष्ट्र के बारे में अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। 34 वर्ष पूर्व बसंत पंचमी के दिन पुरी पीठ पर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का शंकराचार्य पद पर पट्टाभिषेक हुआ था।
शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, आचार्य विवेक मिश्र वृंदावन, प्रफुल्ल चैतन्य ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, राजेश चैतन्य ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य को माला पहनाकर उनके पट्टाभिषेक तिथि पर उनका स्वागत अभिनंदन किया।
इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदू युवाओं को अपने आचार विचार में अपने धर्म को लाना होगा और तब आचरण में भी धर्म आयेगा। युवा पीढ़ी सजग है और जागरूक है। दर्शन विज्ञान व्यवहार के बल पर नवयुवकों को भटकने से बचाना होगा। गाय और गंगा भारत की आत्मा हैं। राजनेताओं में इच्छाशक्ति की कमी के कारण दोनों अपने अस्तित्व से जूझ रही हैं। करोड़ों लोगों की अकाट्य आस्था गंगा यमुना जैसी पवित्र नदियों से जुड़ी है। मानव जीवन की रक्षा के लिए मां गंगा को मौलिक स्वरूप में लौटाना होगा। विकास के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन व महानगरों की गंदगियों तहत फैक्ट्रियों के जहरीले जल को पवित्र नदियों में रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
शिष्यों के साथ किया संगम स्नान
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने शिष्यों के साथ संगम स्नान किया। माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर से करीब 12 बजे संगम स्नान के लिए निकले पुरी शंकराचार्य के साथ उनके निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती सहित शिष्य भी साथ थे। संगम नोज पर पुरी शंकराचार्य के स्वागत अभिनंदन के लिए पहले से उपस्थित बड़े हनुमान मंदिर के महंत बलबीर गिरी ने उनका आशीर्वाद लेते हुए उनका स्वागत अभिनंदन किया। इसके बाद शंकराचार्य ने संगम में शिष्यों के साथ डुबकी लगाई। इस अवसर पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि पवित्र स्नान पर्वों पर तीर्थ क्षेत्रों में पवित्र सरोवरों में स्नान करने का बहुत महत्व है। स्वधर्म का पालन करने पर कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
