•वकीलों ने पुतला फूंका, ‘काला कानून’ बताया
प्रयागराज। प्रयागराज में यूजीसी एक्ट में हालिया संशोधनों को लेकर विरोध की आग तेज होती जा रही है। मंगलवार को संगम नगरी के अलग-अलग इलाकों में छात्रों, अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने इन बदलावों को शिक्षा व्यवस्था और सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य के लिए घातक बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया।
कलेक्ट्रेट परिसर में सवर्ण आर्मी के बैनर तले बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश पांडेय के आह्वान पर यमुना पार इकाई के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए। जिला अध्यक्ष आनंद कुमार द्विवेदी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यूजीसी एक्ट में किए गए संशोधन से सामान्य श्रेणी के छात्रों के अवसर सीमित होंगे और शिक्षा में समानता का संतुलन बिगड़ेगा।
इस दौरान आनंद कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ है और यदि सरकार ने इसे तत्काल वापस नहीं लिया, तो इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्रदर्शन के बाद सवर्ण आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया और चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
विरोध की दूसरी बड़ी तस्वीर हाईकोर्ट के समीप आंबेडकर चौराहे पर देखने को मिली, जहां अधिवक्ताओं ने यूजीसी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कानून का पुतला फूंका। वकीलों का कहना था कि यह संशोधन शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर असर डालता है और छात्रों के अधिकारों को कमजोर करता है। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारेबाजी भी की गई।इस दौरान आनंद कुमार द्विवेदी ने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ है और यदि सरकार ने इसे तत्काल वापस नहीं लिया, तो इसका राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा। प्रदर्शन के बाद सवर्ण आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया और चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
उधर हाईकोर्ट के समीप आंबेडकर चौराहे पर अधिवक्ताओं ने यूजीसी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कानून का पुतला फूंका। वकीलों का कहना था कि यह संशोधन शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर असर डालता है और छात्रों के अधिकारों को कमजोर करता है। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारेबाजी भी की गई।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि यूजीसी एक्ट में किए गए सभी संशोधनों को बिना शर्त वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि सरकार ने संवाद का रास्ता नहीं अपनाया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि यूजीसी एक्ट में किए गए सभी संशोधनों को बिना शर्त वापस लिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि सरकार ने संवाद का रास्ता नहीं अपनाया, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है।
