लखनऊ। विश्व दिव्यांग दिवस पर आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगजन किसी से कम नहीं हैं। उनकी क्षमता, हिम्मत और सफलता नए भारत की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार दोनों को संवेदनशील भूमिका निभाते हुए देश को ‘बाधारहित भारत’ बनाने में योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 30 व्यक्तियों, संस्थाओं एवं नियोक्ताओं को दिव्यांगजन सशक्तिकरण में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया। साथ ही 500 दिव्यांगजन को सहायक उपकरण, ट्राइसाइकिल, अध्ययन सामग्री तथा मेधावी दिव्यांग बच्चों को टैबलेट और प्रमाण-पत्र वितरित किए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अन्य पिछड़ा वर्ग के 5,33,285 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति स्वीकृति प्रमाण-पत्र देने की प्रक्रिया के अंतर्गत कई बच्चों को प्रमाण-पत्र भी सौंपे। शादी अनुदान योजना, कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना और दिव्यांगजन संबंधित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को भी प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
इससे पूर्व उन्होंने दिव्यकला प्रदर्शनी का उद्घाटन कर अवलोकन किया और देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया ‘दिव्यांग’ शब्द सम्मान व संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकारी भवनों, परिवहन और सार्वजनिक स्थानों को बाधारहित बनाया जा रहा है। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को सभी के लिए सुलभ बनाने के प्रयास तेज़ किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट उसकी क्षमता का निर्धारण नहीं करती। इतिहास में ऋषि अष्टावक्र से लेकर संत सूरदास तक अनेक उदाहरण हैं, जिन्होंने सीमाओं के बावजूद अपनी प्रतिभा से समाज को आलोकित किया।
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा दिव्यांगजन कल्याण हेतु कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2017 के पूर्व जहां केवल आठ लाख दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन मिलती थी, वहीं आज 11 लाख से अधिक दिव्यांगजन को पेंशन दी जा रही है, जिसकी राशि बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह की गई है। डीबीटी के माध्यम से यह राशि सीधे उनके खाते में भेजी जाती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, छड़ी, श्रवणयंत्र आदि उपलब्ध कराना अब सरल हुआ है। कानपुर स्थित एलिम्को को सक्रिय करते हुए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों को सशक्त किया गया है। प्रथम चरण में प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर आधुनिक डीआरसी स्थापित किए जाएंगे, ताकि दिव्यांगजन को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दिव्यांगजन को ब्रेल व साइन लैंग्वेज प्रशिक्षण, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य परीक्षण, कौशल विकास, रोजगार और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुविधाएं दी जा रही हैं। राज्य में 4 प्रतिशत सेवाओं में तथा 5 प्रतिशत शिक्षण संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था लागू है। अब तक 16 लाख से अधिक यूनिक दिव्यांग पहचान कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजन की पेंशन 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये की गई है। कृत्रिम अंग वितरण योजना में अनुदान 10,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। अब तक 3,84,000 से अधिक सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। कॉक्लियर इम्प्लांट योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को 6 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इस वर्ष 108 बच्चों को यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है और कई बच्चे सामान्य रूप से संवाद करने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में आश्रयहीन मानसिक दिव्यांगजन के लिए बरेली, मेरठ, गोरखपुर और लखनऊ में आवासीय आश्रय गृह संचालित हैं। चित्रकूट और बांदा में भी नए आश्रय गृह स्थापित किए जा रहे हैं। 16 जनपदों में 24 स्वैच्छिक संस्थान भी मानसिक दिव्यांगजन के लिए प्रशिक्षण केन्द्र चला रहे हैं।
वर्ष 2017 से अब तक 6,100 से अधिक दिव्यांग दम्पतियों को विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया है। 8,835 दिव्यांगजन को स्वरोजगार हेतु सहायता दी गई है। प्री-स्कूल रेडीनेस हेतु 18 जिलों में डे-केयर सेंटर संचालित हैं। प्रदेश में दिव्यांग बच्चों के लिए ‘प्रयास’, ‘संकेत’, ‘ममता’ और ‘स्पर्श’ जैसे राजकीय विद्यालय संचालित हैं। 21 विशेष विद्यालयों में 1,488 बच्चे अध्ययनरत हैं।
प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहाँ दिव्यांगजन की उच्च शिक्षा के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं—डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय और जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट।
मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति वितरण का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक कक्षा 9 से 12 तक के 12,76,000 से अधिक ओबीसी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। वर्ष 2016-17 में जहां 18.83 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिली थी, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 32.22 लाख तक पहुँची है। ओबीसी युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण के लिए 29,769 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।
शादी अनुदान योजना में भी अब 1 लाख गरीब परिवारों को बेटियों के विवाह के लिए अनुदान दिया गया है।कार्यक्रम में राज्यमंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, अमरेश कुमार, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
