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बस्ती। शहर के कर्मा देवी स्मृति पीजी कॉलेज के प्राचार्य एवं अंतरराष्ट्रीय हिंदी प्रचारक डॉ. मुकेश कुमार मिश्र 12 सितंबर 2025 को श्रीलंका के केलनिया विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन विभाग द्वारा आयोजित “हिंदी के बढ़ते कदम” विषयक अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होकर न सिर्फ शहर बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाएंगे।
डॉ. मिश्र हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर सक्रिय रहे हैं। वे पूर्व में भी आर्मेनिया, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, कजाकिस्तान, फीजी, मॉरिशस और सूरीनाम जैसे कई देशों के ओरियंटल स्टडीज विभागों में व्याख्यान दे चुके हैं। साथ ही, श्रीलंका स्थित भारतीय संस्कृति परिषद, कोलंबो में उन्होंने “हिंदी-सिंहली शब्दकोश” पर व्याख्यान देकर दोनों भाषाओं की संरचना और संबंध को रेखांकित किया था।
डॉ. मिश्र का मानना है कि हिंदी राष्ट्रभाषा बने, लेकिन सभी भाषाओं के समन्वय से राष्ट्रभाषा का सर्वोच्च स्थान मिले। वे गांधीजी के विचारों के अनुरूप हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के प्रबल पक्षधर हैं। उनका कहना है कि “जब तक हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा और भारत की राष्ट्रभाषा नहीं बन जाती, मेरा अभियान जारी रहेगा।”
डॉ. मिश्र 11वें और 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन (मॉरिशस एवं फीजी) में भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में भी शामिल हो चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली की व्याख्यान माला के अंतर्गत कालिकट, कोचीन और त्रिवेंद्रम विश्वविद्यालयों में भी सहयोग प्रदान किया है।
शहर के युवा हिंदी प्रचारक के रूप में पहचान बना चुके डॉ. मिश्र की यह अंतरराष्ट्रीय भागीदारी न केवल हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार में अहम कदम है, बल्कि बस्ती की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
