लेखक: डी० डी० पाण्डेय।
विचार मंथन: बीते दिनों पहले विजनरी उद्योगपति गौतम अदाणी आईआईएम मे एक कार्यक्रम में लखनऊ आए। हालांकि पहले भी वह लखनऊ आए हैं। 2022 मे लखनऊ मे आयोजित निवेशक सम्मेलन मे गौतम अदाणी ने यूपी में 70,000 करोड़ रुपये का निवेश और इस निवेश से भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में 30,000 नौकरियों का सृजन होगा करने की बड़ी घोषणा कर लोगों का दिल जीत लिया।
पर इस बार का आना कुछ अलग ही था। इस बार की यात्रा आईआईएम लखनऊ मे प्रमुख कार्यक्रम प्रबंधन का गुर सीख रहे छात्र एवं छात्राओं से रूबरू होने का रहा और अपने उद्बोधन के प्रारम्भ से लेकर अंत तक उन्होने जिस तरह से उपस्थित श्रोताओं को अपने से जोड़ा वह भारत की प्रतिष्ठा को विश्व फ़लक पर ऊंचा करने वाले एक शीर्ष उद्योगपति का उद्बोधन तो नज़र ही आया पर उपस्थित छात्र छात्राओं के लिए वह एक अभिभावक सदिश भी नज़र आए।
(आईआईएम) लखनऊ के छात्रों से न केवल उन्होने संवाद किया अपितु अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। उन्होंने संस्थान को “इंटेलेक्चुअल कैपिटल” के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि यहाँ के छात्र भारत के भविष्य के आर्किटेक्ट हैं। अदाणी का मानना था कि आईआईएम लखनऊ जैसे संस्थान भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और इन्हीं संस्थानों से निकलने वाले छात्र देश की शक्ति और समृद्धि की नींव रखने में सहायक होंगे।
ग़ज़ब की साक्सियत। आईआईएम के छात्र छात्रायें उनके उद्बोधन पर लगातार करतल ध्वनि करते रहे। हो ना हो उनके सामने विश्व पटल पर दस्तक देने वाला भारत का एक शीर्ष उद्योगपति जो उनसे मुखातिब था।
बातचीत मे छात्रों ने कहा कि अडाणी का सेशन बेहद दिलचस्प था। उन्होंने स्टूडेंट्स को रिस्क टेकिंग स्किल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम लोग ही इंडिया के फ्यूचर हैं। आगे हमें ही ड्राइव करना होगा। उन्होंने आउट ऑफ द बॉक्स सोचने को भी जरूरी बताया।उनकी सबसे अहम बात ये लगी कि कंविक्शन बहुत जरूरी है। यह सब बातें दिल को छू गयी।
मैनेजमेंट स्टूडेंट्स को अपनी उद्योग यात्रा के बारे में बताते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि अगर आपको कुछ बड़ा करना है तो बड़े सपने देखने पड़ेंगे और उन्हें पूरा करने के लिए पूरा जोर लगाना होगा। उन्होंने बताया कि हर बार बिजनेस की शुरुआत में ऐसा वक्त आया जब सारे संसाधन खत्म हो गए और मदद करने वाले भी नजर नहीं आए। ऐसे वक्त में एक चीज जो हमेशा उन्हें आगे बढ़ाती रही वह यह दृढ़ विश्वास कि उनके साहसिक सपने संघर्ष के लायक थे।
आज जिस तरह से अदाणी जैसी भारतीय कंपनियाँ देश से निकलकर विदेशों में भी अपना परचम लहरा रही और उनका डंका बज रहा। भारत के तेज़ी के साथ विश्व फलक पर धाक जमाने वाली कंपनियों में शुमार अदाणी समूह ने जिस तरह विदेशों में पोर्ट कारोबार में अपने पाँव जमाये हैं और पड़ोसी बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति शुरू किया वास्तव में भारत की ग्लोबल साख को और मज़बूत कर रहा।
विदेशी मीडिया द्वारा अदाणी समूह को लेकर गढ़े गए बेबुनियाद नकारात्मक छवि को लेकर भी उन्होने अपने उद्बोधन मे टिप्पणी की और कहीं न कहीं से आहात नज़र आए। निःसंदेह गौतम अदाणी ने अपने व्यवसायिक नवाचारों से आज विश्व पटल पर भारत का डंका बजाया है।
आईआईएम लखनऊ में प्रबंधन का गुर सीख रहे छात्रों के सामने गौतम अदाणी का खड़ा होना कम मायने नहीं रखता। छात्रों से मुखातिब होकर कहा कि जब मैं आप सभी को देखता हूं तो विकसित भारत की संभावना दिखाई देती है, लेकिन यह सपना, संभावना और विश्वास भविष्य का भरोसा है। सीधे सपाट रास्ते पर चलकर इतिहास नहीं बनता। इतिहास वो नहीं बनाते, जो वक्त की रेत पर चलते हैं। इतिहास वो रचते हैं, जो अपना रास्ता खुद तलाशते हैं। असली विकास वो नहीं जो सुविधा से मिले, बल्कि असली विकास वो है जो संघर्ष में तपे।
उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों की कहानी से आईआईएम के छात्रों को प्रेरित किया। बताया कि 16 वर्ष की काफी कम उम्र में व्यवसाय की दुनिया में आया और अहमदाबाद से मुंबई शिफ्ट हुआ। मेरी हर अहम यात्रा में ऐसे पल आए हैं, जब मेरे पास संसाधन खत्म हो गए थे। 32 साल की उम्र में 1994 मे अटल विश्वास के साथ खुद की कंपनी खड़ी की और नाम दिया अदाणी इंटरप्राइजेज़।
अपने संबोधन में अदाणी ने कहा कि अपनी प्रोफेशनल यात्रा के अनुभव से कहता हूं कि बिजनेस की दुनिया में कामयाब होने के लिए कुछ अलग करना होगा। जब दुनिया कहे कि यह संभव नहीं है, वहीं से इतिहास रचने की कहानी शुरू होती है। विकास वही, जो मानवता की बुनियाद पर खड़ा हो।
उन्होंने कहा कि साल 2050 तक भारत 25 ट्रिलियन डॉलर की महाशक्ति बन जाएगा। हम दुनिया की सबसे युवा, सबसे जिज्ञासु और सबसे महत्वाकांक्षी कार्यशील आबादी हैं। एक अरब सपने-कुछ कर दिखाने को तैयार हैं। जनसांख्यिकी हमारी ताकत है। दूसरी ताकत है- डिमांड यानी मांग। हम सिर्फ उपभोग नहीं कर रहे, हम दुनिया के लिए बाजार भी बना रहे हैं। आज के इस दौर में, जहां आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई), एल्गोरिदमिक निर्णय और वैश्विक अनिश्चितता हावी है, वहां शिक्षा का असली मूल्य क्या है। तीसरी ताकत – डिजिटल अवसंरचना जो आधार, यूपीआई और ओएनडीसी हमने बनाए हैं, वैसा कोई देश नहीं कर पाया। ये सिर्फ प्लेटफॉर्म नहीं हैं, ये समावेशन, नवाचार और विस्तार के लॉन्चपैड हैं। चौथी ताकत है घरेलू पूंजी ।
उन्होंने कहा कि जल्द की भारत दुनिया का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बनेगा। कुछ बातें ऐसी हैं, जो न तो किसी किताब में लिखी हैं और न ही कहीं सिखाई जा सकती हैं, वे सिर्फ भारतीयता में रची-बसी होती हैं। एक ऐसा विश्व जो युद्धों से टूटा हुआ है, प्रभुत्व की भूख से फटा हुआ है, उसमें भारत संयम के साथ अडिग खड़ा है। यह नैतिक ऊंचाई, इतनी सच्चाई सिर्फ भारत के पास है।
नेतृत्व वही कर सकता है, जो जोखिमों से भरे रास्ते पर चलता है। आपकी यात्रा इस बात का प्रमाण बने कि भारतीय जमीन से उठे सपने भी वैश्विक ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं। अब समय आ गया है कि भारत में जन्मा सपना, भारत की मिट्टी में ही आकार ले। भारत कोई प्रश्न नहीं है जिसे आपको हल करना है। भारत वह उत्तर है जिसे आपके जरिए दुनिया तक पहुंचाना है। यह वही उत्तर है जो बुद्ध की करुणा में था, विवेकानंद की वाणी में जगा, और गांधी के सत्य में चला।
एशिया की सबसे बड़ी स्लम बस्ती मुंबई के धारावी पुनर्विकास का जिक्र करते हुए उन्होने इसे अब तक का सबसे कठिन प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे जटिल सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक ताने-बाने में से एक है।
हर बार जब मैं मुंबई हवाई मार्ग से आता था, तो नीचे फैली इन बस्तियों को देखकर अंतरात्मा व्याकुल हो उठती थी, क्योंकि कोई भी देश वास्तव में तब तक ऊपर नहीं उठ सकता जब तक उसके करोड़ों लोग गरिमा के बिना जीवन जीते हों। सबने कहा, “धारावी बहुत राजनीतिक है।”, “यह बहुत जोखिमभरा है।”, “यह संभालना नामुमकिन है।”
और इसी वजह से मैंने कहा, यह हमें जरूर करना चाहिए।
आईआईएम में स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने भविष्य में सामने आने वाली चुनौतियों और उनके निदान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस, एल्गोरिद्म पर आधारित फैसले लेने के वक्त में पूरी दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिक्षा का मूल्य क्या है? गौतम अदाणी के अनुसार मैनेजमेंट की पारंपरिक पढ़ाई में उद्योग जगत के उन पहलुओं की ही चर्चा होती है जो पहले से किए जा चुका है। सिर्फ यही पढ़ाया जा रहा है कि जोखिम को कैसे कम किया जाए लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि भविष्य को किस तरह से विस्तार दिया जाए।
उन्होंने चेताया कि भविष्य उन लोगों का नहीं होगा जो सुरक्षित खेलेंगे बल्कि उनका होगा जो अपनी संभवनाओं का विस्तार करेंगे। संभावनाओं का विस्तार करने का मतलब है वहां पर मौके तलाशना जहां पर पहले काम नहीं किया गया।
गौतम अदाणी ने कहा कि भविष्य कभी भी डाटा के आधार पर की गई भविष्यवाणियों के आधार पर नहीं बल्कि साहस के बलबूते पर तय होता है। विश्व मंच पर दहाड़ते शेर की मानिंद शक्तिशाली भारत आज हर एक की ज़रूरत है। गौतम अदाणी ऐसा बता कर जाते जाते आईआईएम में स्टूडेंट्स को भविष्य का रोडमैप भी दे गए।
(लेखक स्तंभकार हैं।)
