जोधीपुरवा, मथुरा बाजार (बलरामपुर)। क्षेत्र के जोधीपुरवा मथुरा बाजार स्थित मातवी देवी के निवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान कथा के अंतिम दिन कथा व्यास डॉ. कौशलेन्द्र महाराज ने ब्रह्म के स्वरूप—निर्गुण एवं सगुण, भक्ति और भगवान, आत्मा एवं परमात्मा—का अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण निरूपण किया।
कथा के दौरान उन्होंने सुदामा चरित्र, द्रौपदी चीरहरण, गोपी–उद्धव संवाद, यादववंश श्राप तथा राजा परीक्षित के नागदंश की कथा का रसपूर्ण वर्णन किया, जिससे उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। भक्ति रस में डूबे श्रोता भजनों पर झूमते हुए अपने स्थान पर ही नृत्य करने लगे और तन–मन की सुध-बुध भूल गए।
सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर अंतर्यामी होते हैं; वे प्रत्येक भक्त के मन की व्यथा और दशा भली-भांति जानते हैं। भगवान अपने भक्त के लिए सबसे बड़ा त्याग भी कर सकते हैं, बशर्ते हृदय में छल–कपट न हो। जिनके मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है, भगवान उन्हीं के वश में होते हैं। भगवान के दरबार में जो भी सच्चे मन से आता है, उसकी झोली भर जाती है—जैसे सुदामा की भरी थी।
द्रौपदी चीरहरण के मार्मिक प्रसंग पर श्रोतागण भावविभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं; यदि हम एकनिष्ठ भाव से सच्चे मन से उन्हें पुकारते हैं, तो वे स्वयं दौड़े चले आते हैं। यदि परमात्मा के प्रति हमारी सच्ची और अगाध श्रद्धा है, तो संकट के समय वे किसी न किसी रूप में भक्तों की रक्षा के लिए अवश्य प्रकट होते हैं।
उन्होंने कहा कि संपूर्ण सृष्टि के रचयिता सर्वशक्तिमान होते हुए भी प्रेम और भाव के भूखे हैं। भगवान भक्तों के वश में होते हैं; जिसके साथ भगवान खड़े हो जाते हैं, दुनिया उसका बाल भी बांका नहीं कर सकती। द्रौपदी की लाज इसलिए बची क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनका अटूट विश्वास था। यदि हमारे हृदय में भी द्रौपदी जैसा विश्वास जागृत हो जाए, तो भगवान हमसे दूर नहीं रहते।
गोपी–उद्धव संवाद के श्रवण से श्रोता प्रेमाभक्ति में डूब गए। कथा व्यास ने बताया कि निर्गुण, निराकार ब्रह्म अगम–अगोचर है और सामान्य भक्तों के लिए सुगम नहीं, इसलिए सगुण ब्रह्म की उपासना अत्यंत सरल और सहज है। सगुण रूप की प्रेमाभक्ति के आगे निर्गुण निराकार ब्रह्म का स्वरूप भी फीका पड़ जाता है। श्रीकृष्ण के प्रति गोपिकाओं के हृदय में ऐसा ही कूट–कूटकर भरा प्रेम था, जिसके आगे उद्धव का निर्गुण ब्रह्म का उपदेश भी प्रभावहीन सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य यजमान कमलेश श्रीवास्तव ने यज्ञाचार्य एवं ज्योतिषाचार्य पं. अतुल शास्त्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा उन्हें श्रीमद्भागवत महापुराण, अंगवस्त्र एवं राधा–कृष्ण की प्रतिमा भेंट की।
इस अवसर पर डॉ. विमलेश श्रीवास्तव, प्रीति श्रीवास्तव, नीलम श्रीवास्तव, पूर्व प्रधान राकेश पांडेय, सुशील वाजपेयी, विकास अवस्थी, राजू तिवारी, रोहित पाठक, सूरज दास सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
