भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की मेडिकल जांच कराने की मांग को लेकर दायर एक याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। याचिका में पति ने यह साबित करने के लिए मेडिकल परीक्षण की मांग की थी कि पत्नी ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, 21 जनवरी को दिए गए आदेश में जस्टिस विवेक जैन ने स्पष्ट कहा कि ऐसी याचिका का उद्देश्य पत्नी की तथाकथित वर्जिनिटी जांच कराना है, जो न केवल अनुचित है बल्कि कानूनन भी स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि महिला के हाइमन की स्थिति यह साबित करने का कोई आधार नहीं हो सकती कि उसने कभी शारीरिक संबंध बनाए हैं या नहीं।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मौजूदा न्यायिक दृष्टिकोण महिलाओं की वर्जिनिटी टेस्ट के पूरी तरह खिलाफ है। मेडिकल विज्ञान भी यह मानता है कि कई मामलों में शारीरिक संबंध के बाद भी हाइमन सुरक्षित रह सकता है, वहीं दूसरी ओर बिना किसी यौन संबंध के भी अन्य शारीरिक गतिविधियों के कारण हाइमन क्षतिग्रस्त हो सकता है। ऐसे में केवल हाइमन की मौजूदगी या अनुपस्थिति से पति-पत्नी के बीच संबंधों को साबित नहीं किया जा सकता।
फैमिली कोर्ट के फैसले को मिली मंजूरी
इससे पहले फैमिली कोर्ट में पति ने पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि शारीरिक संबंध न बनाना क्रूरता के दायरे में आता है। वहीं पत्नी ने दहेज के लिए प्रताड़ना और पति द्वारा अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे। फैमिली कोर्ट ने पिछले महीने ही मेडिकल जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस तरह की मेडिकल जांच महिलाओं की गरिमा और अधिकारों के खिलाफ है। अदालत के इस फैसले को महिला अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
