•सुरक्षा बजट लगभग तीन गुना बढ़कर 2013-14 के 39,463 करोड़ रूपए से चालू वित्त वर्ष में 1,16,470 करोड़ रूपए हो गया है
•अश्विनी वैष्णव ने कहा- कोहरे से बचाव के उपकरणों की संख्या 288 गुना बढ़ी है — 2014 के 90 से बढ़कर 2025 में 25,939 हो गई है
•पिछले चार महीनों में 21-21 स्टेशनों पर केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और ट्रैक-सर्किट का काम पूरा हो गया है
गोरखपुर: भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। किसी भी असामान्य घटना की रेलवे प्रशासन द्वारा गहन जांच की जाती है। तकनीकी कारणों के अलावा किसी अन्य कारण की आशंका होने पर राज्य पुलिस की सहायता ली जाती है।
कुछ मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से भी मार्गदर्शन लिया जाता है। हालांकि, जांच का प्राथमिक माध्यम राज्य पुलिस ही है। यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों की जांच, कानून व्यवस्था बनाए रखना और पटरियों, पुलों, सुरंगों आदि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
वर्ष 2023 और 2024 में रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़/तोड़फोड़ की सभी घटनाओं में, राज्यों की पुलिस/जीआरपी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी की गई और उन पर मुकदमा चलाया गया।
रेलवे द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी के साथ बेहतर समन्वय, ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समन्वित कार्रवाई और निगरानी के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों और असुरक्षित इलाकों में रेलकर्मियों, रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और सिविल पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से लगातार गश्त की जा रही है।
उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, असुरक्षित इलाकों में गश्त करने और खतरों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने हेतु विशेष दल गठित किए गए हैं।
रेलवे पटरियों के पास पड़ी सामग्री को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उपयोग शरारती तत्व रेलवे ट्रैक पर रखकर अवरोध उत्पन्न करने के लिए कर सकते हैं।
रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों को ट्रैक पर अवांछित सामग्री रखने, रेल घटकों को हटाने के बाद होने वाली संभावित घटनाओं के परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और उनसे सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध किया जा रहा है।
रेलवे राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनका गठन प्रत्येक राज्य में सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक/पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
अपराध पर नियंत्रण, मामलों के पंजीकरण, उनकी जांच और रेलवे परिसर के साथ-साथ चलती ट्रेनों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी अधिकारियों के साथ सभी स्तरों पर सक्रिय रूप से घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया जाता है। इसमें तोड़फोड़ की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खुफिया जानकारी साझा की जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उपरोक्त के अलावा, स्थिति के अनुसार एनआईए और सीबीआई जैसी विशेष एजेंसियां भी शामिल हैं।
केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ की खुफिया इकाइयां, यानी सीआईबी और एसआईबी को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है और उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि वे खुफिया जानकारी एकत्र करें और पुलिस अधिकारियों के समन्वय से तोड़फोड़ के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुधारने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई उपाय किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप, दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। नीचे दिए गए ग्राफ में दर्शाए अनुसार, परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2024-25 में 31 हो गई है।
गौरतलब है कि 2004-14 की अवधि के दौरान परिणामी रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1711 थी (औसतन 171 प्रति वर्ष), जो 2024-25 में घटकर 31 और 2025-26 में (नवंबर 2025 तक) और भी घटकर 11 रह गई।
रेल संचालन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाए गए विभिन्न सुरक्षा उपाय इस प्रकार हैं:-
भारतीय रेल में सुरक्षा सम्बंधी गतिविधियों पर व्यय में पिछले कुछ वर्षों में निम्नलिखित रूप से वृद्धि हुई है:- सुरक्षा सम्बंधी गतिविधियों पर वर्ष 2013-14 में रु. 39,463 करोड़, वर्ष 2022-23 में रु. 87,327 करोड़, वर्ष 2023-24 में रु. 1,01,651 करोड़, वर्ष 2024-25 में रु. 1,14,022 करोड़ तथा वर्ष 2025-26 में रु. 1,16,470 करोड़ बजट का आवंटन किया गया। मानव विफलता के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 31.10.2025 तक 6,656 स्टेशनों पर बिंदुओं और संकेतों के केंद्रीकृत संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं।
लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 10,098 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। विद्युत माध्यम से ट्रैक की उपलब्धता की पुष्टि करके सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 6,661 स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग की व्यवस्था की गई है। कवच एक अत्यंत तकनीकी रूप से उन्नत प्रणाली है। इसके लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है। कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
प्रारंभ में, कवच संस्करण 3.2 को दक्षिण मध्य रेलवे के 1465 आरकेएम और उत्तर मध्य रेलवे के 80 आरकेएम पर तैनात किया गया था। कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को आरडीएसओ द्वारा 16.07.2024 को मंजूरी दी गई थी।
व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के बाद, कवच संस्करण 4.0 को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पलवल-मथुरा-कोटा-नागदा खंड (633 किमी) और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर हावड़ा-बर्दवान खंड (105 किमी) पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग के शेष खंडों में कवच का कार्यान्वयन शुरू कर दिया गया है।
इसके अलावा, भारतीय रेलवे के सभी जीक्यू, जीडी, एचडीएन और चिन्हित खंडों को कवर करते हुए 15,512 किमी पर कवच का कार्यान्वयन शुरू कर दिया गया है। सिग्नलिंग की सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दों, जैसे अनिवार्य पत्राचार जांच, परिवर्तन कार्य प्रोटोकॉल, पूर्णता आरेखण तैयार करना आदि के बारे में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं।
एस एंड टी उपकरणों के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार डिस्कनेक्शन और रिकनेक्शन की प्रणाली पर पुनः बल दिया गया है। सभी लोकोमोटिव में लोको पायलटों की सतर्कता बढ़ाने के लिए विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (वीसीडी) लगाए गए हैं। कोहरे के कारण कम दृश्यता होने पर चालक दल को आगे के सिग्नल के बारे में सूचित करने के लिए विद्युतीकृत क्षेत्रों में सिग्नल से दो ओएचई मास्ट आगे स्थित मास्ट पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिग्मा बोर्ड लगाए गए हैं।
लोको पायलटों को सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग गेट आदि जैसे निकटवर्ती स्थलों की दूरी का पता चल सके। इसके लिए कोहरे से प्रभावित क्षेत्रों में लोको पायलटों को जीपीएस आधारित कोहरे से सुरक्षा उपकरण (एफएसडी) प्रदान किया जाता है। प्राथमिक ट्रैक नवीनीकरण के दौरान 60 किलोग्राम भार, 90 अल्टीमेट टेन्साइल स्ट्रेंथ (यूटीएस) रेल, प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्लीपर (पीएससी) नॉर्मल/वाइड बेस स्लीपर (इलास्टिक फास्टनिंग के साथ), पीएससी स्लीपरों पर फैन शेप्ड लेआउट टर्नआउट और गर्डर पुलों पर स्टील चैनल/एच-बीम स्लीपरों से युक्त आधुनिक ट्रैक संरचना का उपयोग किया जाता है।
मानवीय गलतियों को कम करने के लिए पीक्यूआरएस, टीआरटी, टी-28 आदि जैसी ट्रैक मशीनों के उपयोग के माध्यम से ट्रैक बिछाने की गतिविधि मशीनों से की जाती है। रेल नवीनीकरण की प्रगति बढ़ाने और जोड़ों की वेल्डिंग से बचने के लिए 130 मीटर/260 मीटर लंबे रेल पैनलों की आपूर्ति को अधिकतम करना, जिससे सुरक्षा में सुधार हो सके।
रेलों में खामियों का पता लगाने और दोषपूर्ण रेलों को समय पर हटाने के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (यूएसएफडी) परीक्षण। लंबी रेलों की बिछावट, एल्युमिनो थर्मिक वेल्डिंग का न्यूनतम उपयोग और रेलों के लिए बेहतर वेल्डिंग तकनीक, जैसे फ्लैश बट वेल्डिंग को अपनाना। ओएमएस (ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम) और टीआरसी (ट्रैक रिकॉर्डिंग कार) द्वारा ट्रैक ज्यामिति की निगरानी। वेल्ड/रेल फ्रैक्चर की जांच के लिए रेलवे ट्रैक पर गश्त।
टर्नआउट नवीनीकरण कार्यों में थिक वेब स्विच और वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग का उपयोग। कर्मचारियों को सुरक्षित प्रक्रियाओं के पालन के लिए नियमित अंतराल पर निरीक्षण और प्रशिक्षण देना। ट्रैक परिसंपत्तियों की वेब आधारित ऑनलाइन निगरानी प्रणाली, जैसे ट्रैक डेटाबेस और निर्णय समर्थन प्रणाली, को तर्कसंगत रखरखाव आवश्यकताओं का निर्णय लेने और इनपुट को अनुकूलित करने के लिए अपनाया गया है। एकीकृत ब्लॉक, कॉरिडोर ब्लॉक, कार्यस्थल सुरक्षा, मानसून के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां आदि ट्रैक की सुरक्षा से सम्बंधित मुद्दों के बारे में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे की संपत्तियों (कोच और वैगन) का निवारक रखरखाव सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। पारंपरिक आईसीएफ डिज़ाइन के कोचों को एलएचबी डिज़ाइन के कोचों से बदला जा रहा है।
ब्रॉड गेज (बीजी) रूट पर सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग (यूएमएलसी) जनवरी 2019 तक हटा दिए गए हैं। रेलवे पुलों की सुरक्षा नियमित निरीक्षण के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। इन निरीक्षणों के दौरान पाई गई स्थिति के आधार पर पुलों की मरम्मत/पुनर्वास की आवश्यकता पर विचार किया जाता है।
भारतीय रेल ने सभी कोचों में यात्रियों की व्यापक जानकारी के लिए वैधानिक “अग्नि सम्बंधी नोटिस” प्रदर्शित किए हैं। आग से बचाव के लिए विभिन्न नियमों और सावधानियों के बारे में यात्रियों को शिक्षित और जागरूक करने के लिए प्रत्येक कोच में अग्नि सम्बंधी पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें ज्वलनशील सामग्री, विस्फोटक न ले जाने, कोच के अंदर धूम्रपान निषेध, जुर्माने आदि से सम्बंधित संदेश शामिल हैं।
उत्पादन इकाइयां नवनिर्मित पावर कारों और पैंट्री कारों में अग्नि पहचान एवं शमन प्रणाली तथा नवनिर्मित कोचों में अग्नि और धुआं पहचान प्रणाली उपलब्ध करा रही हैं। क्षेत्रीय रेलवे द्वारा मौजूदा कोचों में भी चरणबद्ध तरीके से इन प्रणालियों को लगाने का कार्य प्रगति पर है। कर्मचारियों का नियमित रूप से परामर्श एवं प्रशिक्षण किया जाता है।
भारतीय रेल (खुली लाइनें) के सामान्य नियमों में 30.11.2023 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से रोलिंग ब्लॉक की अवधारणा को लागू किया गया है। इसके तहत परिसंपत्तियों के एकीकृत रखरखाव/मरम्मत/प्रतिस्थापन का कार्य 52 सप्ताह पहले तक रोलिंग आधार पर योजनाबद्ध किया जाता है और योजना के अनुसार निष्पादित किया जाता है।
केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
