जौनपुर। जौनपुर पुलिस महकमे में इन दिनों दारोगा चंदन कुमार राय को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि दारोगा चंदन राय का अंतर्जनपदीय तबादला पिछले साल ही हो चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक उन्हें जौनपुर से रिलीव नहीं किया गया। इस स्थिति ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आमतौर पर देखा जाता है कि जैसे ही किसी सामान्य पुलिसकर्मी का ट्रांसफर आदेश जारी होता है, उसे तत्काल रिलीव कर दिया जाता है। लेकिन यहां मामला अलग नजर आ रहा है। PRO चंदन राय के लिए मानो अलग नियम लागू हों, क्योंकि एक साल बीत जाने के बावजूद ट्रांसफर आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जौनपुर में ट्रांसफर आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं? क्या दारोगा चंदन राय SP साहब की ऐसी मजबूरी बन चुके हैं, जिन्हें चाहकर भी छोड़ा नहीं जा सकता?
बताया जाता है कि दारोगा चंदन राय का नाम पहले भी कई बार विवादों से जुड़ चुका है। इसके बावजूद उन पर SP साहब की कथित “खास मेहरबानी” पुलिस महकमे के अंदर और बाहर चर्चा का विषय बनी हुई है।
अब सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह प्रशासनिक मजबूरी है या फिर निजी भरोसे का मामला?
क्या विवादों से घिरे अधिकारी को बचाने की कोशिश की जा रही है?
या फिर PRO होने का फायदा उन्हें नियमों से ऊपर रख रहा है?
एक साल की देरी अपने आप में बहुत कुछ बयान करती है। जानकारों का कहना है कि अगर मामला सामान्य होता, तो अब तक रिलीविंग हो चुकी होती। यह देरी इस ओर इशारा करती है कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसा जरूर है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।
फिलहाल जौनपुर में यही चर्चा है कि दारोगा चंदन कुमार राय SP साहब की मजबूरी हैं या फिर किसी बड़ी जरूरत का हिस्सा? इस पूरे प्रकरण पर अब सभी की नजरें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

