•वी.के. वर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में विशेषज्ञों और युवाओं का मंथन।
बस्ती। देश में जैव विविधता संरक्षण को लेकर बढ़ती चुनौतियों और युवाओं की निर्णायक भूमिका पर गंभीर विमर्श के उद्देश्य से वी.के. वर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में एक राष्ट्रीय स्तर का एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। यह सेमिनार विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली एवं युवा विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आलोक रंजन पटेल ने दीप प्रज्वलन करके किया। इस सेमिनार में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों से आए समाज कार्य, मेडिकल एवं विज्ञान विषयों के ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।डॉ बसंत कुमार ने युवाओं को बताया “राष्ट्र का पर्यावरण प्रहरी”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संदीप विश्व विद्यालय में प्रो डॉ बसंत कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और भावी पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सैनिक सीमा की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार युवाओं को प्रकृति और जैव विविधता का प्रहरी बनना होगा। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा भाव के साथ पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
प्रो. डॉ. शिवेंद्र मोहन पाण्डेय ने जैव विविधता के वैज्ञानिक आधार को किया स्पष्ट
सेमिनार के मुख्य वक्ता, शिव हर्ष किसान पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रो शिवेंद्र मोहन पाण्डेय ने अपने विस्तृत व्याख्यान में जैव विविधता की परिभाषा, उसके घटकों और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हो रहे क्षरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सूक्ष्म जीव, वनस्पति, पारिस्थितिक तंत्र और कृषि विविधता भी शामिल है।
सामाजिक कार्यकर्ता नितेश शर्मा ने युवाओं को शोध, नवाचार और नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक प्रसार राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के कारण जैव विविधता पर गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है। वैज्ञानिक फसल सुरक्षा डॉ प्रेम शंकर उन्होंने पारंपरिक बीजों के संरक्षण, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और जल-संरक्षण को जैव विविधता बचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने युवाओं से कृषि को केवल पेशा नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ साझेदारी के रूप में देखने का आग्रह किया।
उद्यान विशेषज्ञ मंगला प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के बीच गहरा संबंध है। मुख्य अतिथि आलोक रंजन पटेल ने बताया कि औषधीय पौधों, पोषक आहार और स्वच्छ पर्यावरण के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से जैव विविधता को स्वास्थ्य नीति का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में सोचने का आग्रह किया।
उदय शंकर सिंह: युवा शक्ति ही जैव विविधता संरक्षण की असली ताकत
विश्व युवक केंद्र, नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय शंकर सिंह ने कहा कि आज का युवा यदि जागरूक, संगठित और प्रतिबद्ध हो जाए तो जैव विविधता संरक्षण एक जन आंदोलन बन सकता है। उन्होंने युवाओं को पर्यावरण नेतृत्व के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
भानु प्रकाश राणा ने मीडिया की भूमिका को बताया अहम
फार्म एन फूड के एग्रो एडिटर भानु प्रकाश राणा ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सही जानकारी, वैज्ञानिक तथ्यों और जमीनी प्रयासों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाकर जनजागरूकता को सशक्त बनाया जा सकता है।
आनंद कुमार नें ने शहरी क्षेत्रों में घटती हरियाली और जैव विविधता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि होम गार्डनिंग, किचन गार्डन और शहरी वृक्षारोपण युवाओं के लिए प्रभावी पहल हो सकती है।
प्रगतिशील कृषकों ने साझा किए अनुभव
प्रगतिशील कृषक अरविंद कुमार सिंह, राम पूरन चौधरी एवं राम मूर्ति मिश्र, सतेंद्र मौर्य, राधे श्याम चौधरी, प्रशांत द्विवेदी, शशांक शुक्ल, मंगेश दुबे, बबिता गौतम, संजय गौतम, सुरेश पाण्डेय ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार जैविक खेती और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
कार्यक्रम बृहस्पति कुमार पाण्डेय ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जैव विविधता संरक्षण को केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन और सामाजिक कार्यों का हिस्सा बनाएं।
संवादात्मक सत्र और संकल्प के साथ समापन
सेमिनार के दौरान युवाओं और विशेषज्ञों के बीच संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े प्रश्न पूछे। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि युवा वर्ग जैव विविधता संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक निरंतर और संगठित प्रयास करेगा।
