•15,512 मार्ग किमी पर ट्रैकसाइड कवच का कार्यान्वयन शुरू किया गया, जिसमें भारतीय रेलवे के सभी स्वर्णिम चतुर्भुज, स्वर्णिम विकर्ण, उच्च घनत्व नेटवर्क और चिन्हित खंड शामिल हैं
•कवच 4.0 में उच्च स्थान सटीकता, बेहतर यार्ड सिग्नल सूचना, ओएफसी-आधारित स्टेशन इंटरफेस और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एकीकरण के लिए सीधा इंटरफेस शामिल है, जिससे यात्री सुरक्षा में वृद्धि होगी
गोरखपुर। कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है। कवच एक अत्यधिक तकनीकी रूप से गहन प्रणाली है, जिसके लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन (एसआईएल-4) की आवश्यकता होती है।
कवच, लोको पायलट द्वारा ब्रेक लगाने में असफल रहने की स्थिति में स्वचालित ब्रेक लगाकर रेलगाड़ियों को निर्दिष्ट गति सीमा के अंदर चलाने में लोको पायलट की सहायता करता है तथा खराब मौसम के दौरान रेलगाड़ियों को सुरक्षित रूप से चलाने में भी मदद करता है। यात्री ट्रेनों पर पहला परीक्षण फरवरी 2016 में शुरू किया गया था।
प्राप्त अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा निर्धारक (आईएसए) द्वारा प्रणाली के स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर, कवच संस्करण 3.2 की आपूर्ति के लिए 2018-19 में तीन फर्मों को मंजूरी दी गई थी। कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के रूप में अपनाया गया था।
कवच प्रणाली के कार्यान्वयन में प्रमुख गतिविधियां – प्रत्येक स्टेशन, ब्लॉक सेक्शन पर स्टेशन कवच की स्थापना, संपूर्ण ट्रैक लंबाई में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग की स्थापना, पूरे खंड में दूरसंचार टावरों की स्थापना, ट्रैक के साथ ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना, भारतीय रेलवे पर चलने वाले प्रत्येक लोकोमोटिव पर लोको कवच का प्रावधान शामिल हैं।
दक्षिण मध्य रेलवे पर 1465 मार्ग किलोमीटर पर कवच संस्करण 3.2 की तैनाती और प्राप्त अनुभव के आधार पर इसमें और सुधार किए गए। अंततः, कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा 16. जुलाई 2024 को अनुमोदित किया गया। कवच संस्करण 4.0 में विविध रेलवे नेटवर्क के लिए आवश्यक सभी प्रमुख विशेषताएँ शामिल हैं।
यह भारतीय रेलवे की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय रेलवे ने बहुत कम समय में ही स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित, परीक्षण और लागू करना शुरू कर दिया है। संस्करण 4.0 में प्रमुख सुधारों में स्थान सटीकता में वृद्धि, बड़े यार्डों में सिग्नल संबंधी पहलुओं की बेहतर जानकारी, ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) पर स्टेशन-से-स्टेशन कवच इंटरफ़ेस और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से सीधा इंटरफ़ेस शामिल हैं। इन सुधारों के साथ, कवच संस्करण 4.0 को भारतीय रेलवे में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना है।
व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के बाद, कवच संस्करण 4.0 को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पलवल-मथुरा-नागदा खंड (633 मार्ग किमी) और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर हावड़ा-बर्धमान खंड (105 मार्ग किमी) पर 738 मार्ग किमी पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। कवच का कार्यान्वयन दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के शेष खंडों में भी शुरू किया गया है।
दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर सहित उच्च घनत्व वाले मार्गों पर कवच की प्रमुख प्रगति – 7129 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का कार्य, 860 दूरसंचार टावरों की स्थापना, 549 स्टेशनों पर कवच का प्रावधान, 2674 मार्ग किलो मीटर ट्रैक साइड उपकरणों की स्थापना, 4,154 लोको पर कवच का प्रावधान प्रगति पर है।
भारतीय रेलवे के सभी जीक्यू, जीडी, एचडीएन और चिन्हित खंडों को कवर करते हुए 15,512 रूट किलोमीटर पर ट्रैक साइड कवच कार्यान्वयन कार्य शुरू किया गया है। कवच संस्करण 4.0 से अन्य 9,069 इंजनों को सुसज्जित करने के लिए बोलियाँ आमंत्रित की गई हैं। कवच को चरणबद्ध तरीके से इंजनों में उपलब्ध कराया जा रहा है।
सभी संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय रेलवे के केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थानों में कवच पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक 40 हजार से ज़्यादा तकनीशियनों, ऑपरेटरों और इंजीनियरों को कवच तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें 30 हजार लोको पायलट और सहायक लोको पायलट शामिल हैं। ये पाठ्यक्रम भारतीय रेल सिंगनल इंजीनियरी और दूरसंचार संस्थान के सहयोग से तैयार किए गए हैं।
कवच के स्टेशन उपकरण सहित ट्रैक साइड के प्रावधान की लागत लगभग 50 लाख रुपये/किमी है और इंजनों पर कवच उपकरण के प्रावधान की लागत लगभग 80 लाख रुपये/लोको है। अक्टूबर 2025 तक कवच कार्यों पर उपयोग की गई धनराशि 2,354.36 करोड़ रुपये है। वर्ष 2025-26 के दौरान धनराशि का आवंटन 1673.19 करोड़ रुपये है। कार्य की प्रगति के अनुसार आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
