लखनऊ। सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था अदब कल्चर वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के प्रेक्षागृह में आयोजित ‘शायरों का आशियाना’ कार्यक्रम ने श्रोताओं को शेरों और शायरी के माध्यम से मंत्र-मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मोहम्मद आरिफ की अध्यक्षता में वरिष्ठ धर्म गुरु मौलाना खालिद रशिद फिरंगी महली, पूर्व राज्य सभा सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी एल पुनिया, हाज़ी एजाज़ चांदी वाले और फुरकान कुरैशी ने शमां रौशन कर किया।
मौलाना खालिद रशिद फिरंगी महली ने अपने संबोधन में कहा कि जिनकी याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, वे उर्दू पत्रकारिता जगत की नामचीन हस्ती थे और उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से उर्दू अदब की महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। उन्होंने आयोजक सईद हाशमी और सत्यम रोशन को इस प्रयास के लिए बधाई दी। हाजी एजाज़ चांदी वाले ने कहा कि मुशायरा और कवि सम्मेलन हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं।
डॉ. तारिक सिद्दीकी ने पत्रकार जीलानी खान के लेखन के माध्यम से समाज और सरकार को आईना दिखाने की अहमियत पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में शेख ताहिर सिद्दीकी, ताहिरा हसन, शहला हक, तबस्सुम किदवई, कारी इम्तियाज प्रतापगढ़ी, डॉ. फैसल खान, मोहम्मद शमीम, मोहम्मद फैजान, मनसूर खान, डॉ. पवन शर्मा, मोहम्मद नासिर और अमीना मोजीब सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सोसाइटी की ओर से समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले मेहमानों को सम्मानित भी किया गया।
सिद्धकी ने अपने शेर प्रस्तुत करते हुए कहा, “हमें सिखाओ उड़ने के तरीके, हम लोग पेड़ से आएं हैं, पिंजरे से नहीं आएं हैं।” मंच संचालन असीम काकोरवी, रुखसार बलरामपुरी, गुले शबा, निखत मुरादाबादी और रुबीना अयाज ने अपनी सुरीली आवाज़ से श्रोताओं को उनकी ग़ज़लों में झूमने पर मजबूर कर दिया।
मुशायरे में फैज़ खलीलाबादी, क़ामिल अमान, उस्मान मीनाई, सौरभ जायसवाल, रिजवान मालिक और मोहित रिदा सहित अन्य कवियों ने अपनी शेरों-शायरी से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
इस अवसर पर वासिफ राणा, शहजाद कुरैशी, मोहम्मद सैफ, चौधरी शादाब, हाफिज आमिर अहमद, सलमान मंसूरी, जैनब सिद्दीकी, इमराना अजमत, नेहा परवीन, वजहत अनवर, अली नईम राजी और कमरुज्जमा नदवी सहित नगर के नामचीन लोग भी मौजूद रहे।अंत में कार्यक्रम के संयोजक सईद हाशमी और सत्यम रोशन ने सभी अतिथियों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
