बस्ती। अखंड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज के निदेशक डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आज के समय में गर्दन का रोग आम होता जा रहा है। इसमें सर्वाइकल की सात कशेरुकाओं (वर्टिब्रा) में से कुछ के आसपास सूजन आ जाती है, जिससे गर्दन में दर्द होने लगता है। प्रारंभ में यह दर्द केवल गर्दन तक सीमित रहता है, लेकिन आगे चलकर अन्य परेशानियों का कारण बन सकता है।

सेमरियावां स्थित निज़ामिया स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर के दौरान डॉ. सिंह ने बताया कि इसके साथ होने वाले प्रमुख लक्षण हैं- चक्कर आना, हाथों में दर्द, पतलापन, हाथों में कमजोरी, पीठ में दर्द, अंगुलियों में दर्द या सुन्नपन, अंगुलियों की पकड़ कमजोर होना, चेहरे पर तनाव, आंखों में तनाव और गर्दन में जकड़न।
डॉ. सिंह के अनुसार, इन समस्याओं के समाधान के लिए अपने दोनों अंगूठों में या बाएं अंगूठे में मेथी की पट्टी बांधकर, उस पर मैग्नेट पेपर टेप लगाकर प्रेशर दिया जाए तो लाभ मिल सकता है।
एक्यूप्रेशर थैरेपिस्ट नदीम अहमद ने बताया कि इलेक्ट्रो-एक्यूप्रेशर एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है, जो विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक पूरक उपचार के रूप में उपयोग की जा सकती है। इसे सीखकर और नियमित रूप से अपनाकर रोग को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। यह चिकित्सा सस्ती और सरल है।
शिविर में वामिक भाई, इक़बाल, तनवीर अहमद, अफ़ितुम, सुग्रीम, निशा और आकांक्षा आदि उपस्थित रहे।
