लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर दालमंडी, वाराणसी जा रहे समाजवादी प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन द्वारा लखनऊ में ही रोक लिया गया। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव सहित कुछ अन्य नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
लाल बिहारी यादव ने कहा कि दालमंडी प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब हक और इंसाफ की आवाज बुलंद होती है तो सत्ता के गलियारों में बैठे लोग बेचैन हो जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार से मुलाकात करने जा रहे समाजवादी प्रतिनिधिमंडल को नजरबंद करना, नेताओं के घरों पर पुलिस तैनात करना और बिना अनुमति आवागमन पर रोक लगाना सरकार की मजबूती नहीं, बल्कि उसके भय और नाकामी का प्रमाण है।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना भी जुर्म हो गया है? क्या पीड़ितों का दर्द बांटना भी अनुमति का मोहताज होगा?
उन्होंने कहा कि जो सरकार अपने ही नागरिकों की आवाज से डर जाए, वह नैतिक रूप से कमजोर हो चुकी होती है। दालमंडी की घटना पर पर्दा डालने की कोशिशें इस बात का संकेत हैं कि सरकार सच का सामना करने से घबरा रही है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा को बंद दरवाजों में कैद नहीं किया जा सकता और पुलिस का पहरा घर के बाहर हो सकता है, लेकिन इरादों पर नहीं।प्रतिनिधिमंडल में सुरेन्द्र पटेल (पूर्व मंत्री), आशुतोष सिन्हा (सदस्य विधान परिषद), किशन दीक्षित (पूर्व प्रत्याशी), सुजीत यादव (जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी वाराणसी), हाजी अब्दुल शमद अंसारी (पूर्व विधायक), रिबू श्रीवास्तव (प्रदेश अध्यक्ष, महिला सभा), प्रदीप जायसवाल (प्रदेश अध्यक्ष, व्यापार सभा), अशफाक अहमद ‘डब्लू’ (पूर्व प्रत्याशी), पूजा यादव (पूर्व प्रत्याशी), अजय चौरसिया (प्रदेश सचिव), मो. दिलशाद अहमद (विशेष आमंत्रित सदस्य), विष्णु शर्मा (पूर्व महानगर अध्यक्ष) और लालू यादव (पूर्व महासचिव) शामिल थे।
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