•पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान।
मीरजापुर। देहात कोतवाली थाना क्षेत्र के चिन्दलिख दुबेपुर में खेत की मेड़ विवाद (कहासुनी) से लेकर मारपीट तक के मामले में की गई एक तरफा कार्यवाही के चलते मीरजापुर की देहात कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए है, जिसके बाद पुलिस की विश्वसनीयता एक बार फिर संदेह के घेरे में है।
बता दें कि देहात कोतवाली पुलिस ने एक घटना की चार दिन बाद दूसरे पक्ष से तहरीर लेकर पीड़ित पक्ष पर ही एक तरफा कार्यवाही करते हुए चलानी कार्यवाही कर दी है, जिसके बाद से प्रथम पीड़ित पक्ष सदमे में हैं।
घटना बीते माह जुलाई का देहात कोतवाली क्षेत्र के चिंदलिकपुर दुबेपुर का है, जब खेत में काम करते समय दो सगे भाई गौरीशंकर और रमाशंकर मेड़ सीधी करने को लेकर आपस में उलझ गए थे। खेत का मामला घर आने पर बच्चों के कारण बढ़ गया और विवाद के दौरान धक्का- मुक्की की घटना होने की चर्चा है।
घटना को लेकर एक पक्ष रितेश व अरविंद पुत्र रामाशंकर ने बताया कि उन्होंने अगले ही दिन घटना से संबंधित सूचना थाने में तहरीर देकर की थी, जिसका साक्ष्य उनके पास सुरक्षित है और घटना में कोई कार्यवाही नहीं की गई। जबकि दूसरे पक्ष प्रशान्त कुमार द्वारा उसी प्रकरण में चार दिन बाद 18 जुलाई को दी गई शिकायती प्रार्थना पत्र पर देहात कोतवाली पुलिस ने बिना सत्यता की जांच किए प्राथमिक कार्यवाही ही नहीं बल्कि मामले को और आगे बढ़ा दिया जो शांति व्यवस्था के लिए खतरनाक ही कहां जाएगा है।
इस मामले में पुलिसिया एक पक्षीय कार्रवाई का असर यह हुआ है कि आज दोनों पक्षों में सुलह समझौते की जगह रंजीश ने ले ली है। दोनों पक्ष एक दूसरे के विरुद्ध पुलिस और न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिए हैं।
वहीं जिले के ही पड़री थाना क्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भेड़ पालक से प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर पुलिस पैसे (खर्चा बरचा) मांग रही है का आरोप है। वर्तमान पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा कड़क मिज़ाज और चुस्त पुलिसिंग व्यवस्था के लिए चर्चित हैं, लेकिन शायद उनके अधीनस्थ पुलिस अधिकारी की मंशा आम जन में पुलिस के प्रति विश्वास पैदा करने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं है।
नतीजा यह है कि इलाकाई पुलिस और विवेचक सूचनाओं को छुपाते हुए महज फोटो खींच कर एक पक्षीय और मनमाफ़िक रिपोर्ट लगाकर विवादों को बढ़ाने में सहायक साबित हो रहें हैं।
