सुल्तानपुर। कभी अवैध निर्माण पर काल बनकर टूटने वाला योगी मॉडल अब पयागीपुर–अहिमाने मार्ग पर आकर हांफने लगा है। सड़क के दोनों ओर दर्जनों अवैध निर्माण बदस्तूर जारी हैं, मानो कानून ने आंखों पर पट्टी बांध ली हो और प्रशासन ने मौन व्रत ले लिया हो।
सूत्र बताते हैं कि नए साल में जेई की जांच रिपोर्ट में दर्जनों लोगों को नोटिस जारी किए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि केवल 10 मामलों में ही वाद दर्ज हुए। सवाल यह है कि बाकी नोटिस गए कहां। क्या वे फाइलों में दब गए या फिर खास बनते ही कानून से ऊपर हो गए,,?
चर्चाएं गर्म हैं कि कुछ निर्माणकर्ताओं पर एसडीएम साहब की विशेष कृपा है, इसी कारण उनकी नोटिस बिना हस्ताक्षर के ही दफ्तरों में रोक ली गईं। आरोप है प्रमाण नहीं लेकिन सवाल तो बनता है। जब पड़ोसी जिले के निवासी कनेक्शनधारी और देखे जाने वाले लोग हों तो क्या नियम-कानून अलग हो जाते हैं? अगर यही हाल रहा तो योगी जी की ज़ीरो टॉलरेंस नीति का क्या हश्र होगा,,?
क्या बुलडोज़र अब केवल तस्वीरों और भाषणों तक सीमित रह गया है। क्या कानून सिर्फ कमजोर के लिए है और ताकतवर के लिए रास्ता?
जनमानस देख रही है सवाल पूछ रही है और जवाब अब टाले नहीं जा सकते। क्योंकि जब अवैध निर्माण को संरक्षण और कार्रवाई को चयन मिल जाए तो फिर न्याय नहीं, केवल संदेह पैदा होता है। अब फैसला शासन-प्रशासन को करना है कि बुलडोज़र चलेगा या बहाने?
