प्रयागराज। बसंत पंचमी का तीसरा अमृत स्नान होने के साथ ही महाकुम्भ क्षेत्र से अखाड़ों की धर्मध्वजा उतरने लगी है। मंगलवार को निर्मल और नया उदासीन अखाड़े की धर्मध्वजा उतारी गई। मेला क्षेत्र में स्थापित गुरु ग्रंथ साहिब को कल्याणी देवी स्थित पक्की संगत ले जाया गया। इसी के साथ अखाड़ों के संत अपने अपने स्थानों को रवाना होने लगे। काफी संत कनखल हरिद्वार स्थित मुख्यालय की ओर कूच कर गए तो कई लोग दिल्ली, पंजाब आदि की तरफ रवाना हुए।

नया उदासीन अखाड़े की धर्मध्वजा भी उतारी गई। वहीं बड़ा उदासीन अखाड़े की धर्मध्वजा सात फरवरी को उतरेगी और आठ को संत यहां से कीडगंज मुख्यालय जाएंगे। कुछ दिनों तक रमता पंच कीडगंज में ही विश्राम करेगा और उसके बाद आगे की यात्रा पर निकलेंगे। अखाड़ों के अमृत स्नान के लिए संगम पर की गई बैरिकेडिंग भी अब उखाड़ी जा रही है। यह बैरिकेडिंग अखाड़ों के स्नान के वक्त आम श्रद्धालुओं को वहां तक जाने से रोकने के लिए लगाई गई थी।
वसंत पंचमी अमृत स्नान के बाद अखाड़ों ने प्रस्थान की तैयारी शुरू कर दी है। एक अखाड़े की धर्मध्वजा उतर गई है, कुछ की भूमिका बनने लगी है। प्रस्थान का शुभ मुहूर्त देखा जा रहा है।
पंचनाम आवाहन अखाड़े में प्रस्थान की पूरी तैयारी है लेकिन काशी प्रवास के लिए मुहूर्त पर मंथन हो रहा है। अखाड़े के धर्मगुरु अनंत कौशल महंत शिवदास के अनुसार मुहूर्त निकलते ही विधि-विधान से धर्मध्वजा उतारी जाएगी और जयकारे के साथ काशी विश्वनाथ दरबार के लिए धर्मयात्रा आगे बढ़ जाएगी। इसी अखाड़े के अवधेश पुरी ने बताया कि अधिकतम दो से तीन दिन में उनका पूरा अखाड़ा काशी पहुंच जाएगा। पंचायती निरंजनी अखाड़े ने काशी जाने की योजना बना ली है। अखाड़े के किशोर गिरि के अनुसार महाकुंभ के बाद सभी सात शैव अखाड़े काशी में इकट्ठा होंगे और सनातन के विकास की आगे की योजना बनाएंगे। 15 फरवरी को उनका अखाड़ा अपने मूल स्थान हरिद्वार चला जाएगा।
शीघ्र प्रस्थान करेंगे वैष्णव अखाड़े :-
वैष्णव मतावलंबी अखाड़े अयोध्या जाएंगे और रामलला के चरणों में शीश नवाएंगे। वैष्णव परंपरा के निर्मोही अनी अखाड़े के अध्यक्ष राजेंद्र दास अयोध्या जाने की योजना बताई। इसी परंपरा के निर्वाणी अनी और दिगंबर अनी अखाड़ों के प्रस्थान की भी कुछ ऐसी ही योजना है।
उतारी गई नया पंचायती अखाड़े की धर्म ध्वजा, बड़ा पंचायती और निर्मल भी तैयारी में :- उदासीन और निर्मल अखाड़ों को भगवान विष्णु के धाम हरिद्वार जाना है और महाकुंभ में प्रवास से मिले पुण्य को जन-जन तक पहुंचाना है।
नए उदासीन अखाड़े और बड़े उदासीन अखाड़े की धर्मध्वजा उतरने की तिथि निर्धारित हो गई है। आज बुधवार को नए पंचायती अखाड़े की धर्म ध्वजा उतर गई। सात फरवरी को बड़े पंचायती अखाड़े की धर्मध्वजा उतारी जाएगी। बड़े उदासीन के धर्मगुरु प्रयागराज के कीडगंज में कुछ दिन तक डेरा जमाएंगे। उसके बाद अपने मूल स्थान हरिद्वार के लिए रवाना हो जाएंगे। बड़े उदासीन अखाड़े के महंत दुर्गादास ने बताया कि कीडगंज में उनके अखाड़े का मुख्यालय है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी अमृत स्नान के बाद वहां हाजिरी लगाने की परंपरा है।
कढ़ी-पकौड़ी खाकर उतारी निर्मल अखाड़े की धर्मध्वजा:- पंचायती अखाड़ा निर्मल ने वसंत पंचमी के अमृत स्नान के अगले दिन मंगलवार को महाकुंभ नगर में स्थापित अपनी धर्मध्वजा उतार दी। इस अनुष्ठान से पहले कढ़ी-पकौड़ी का परंपरागत प्रसाद सभी संतों ने ग्रहण किया। फिर धर्मध्वजा उतारकर हरिद्वार जाने की तैयारी शुरू कर दी।
अखाड़े के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने बताया कि अखाड़े के कुछ संत अभी प्रयागराज में ही निवास करेंगे और एक सप्ताह बाद हरिद्वार आएंगे। पंचदशनाम जूना अखाड़े के शिविर में भी काशी प्रस्थान की तैयारी शुरू हो गई है। धर्मध्वजा उतारने के लिए सात फरवरी की तिथि भी निर्धारित कर ली गई है।
अखाड़े के मुख्य संरक्षक हरि गिरि ने बताया कि सात फरवरी को प्रस्थान का क्रम शुरू हो जाएगा। महाशिवरात्रि तक काशी में ही प्रवास रहेगा। काशी विश्वनाथ की पूजा-अर्चना के बाद यह महाकुंभ से शुरू हुआ अनुष्ठान सम्पन्न होगा।
