लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचाने और औद्योगिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के अंतर्गत राज्य में स्व-प्रमाणन व्यवस्था और थर्ड पार्टी ऑडिट योजना लागू कर दी गई है। इस संबंध में शासनादेश 12 नवंबर 2025 को जारी किया गया है।
प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम.के. शन्मुगा सुंदरम ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत कम जोखिम वाले गैर-खतरनाक प्रतिष्ठान या कारखाने यदि स्व-प्रमाणन प्रणाली अपनाते हैं, तो उन्हें पांच वर्ष में केवल एक बार रेंडम आधार पर संयुक्त निरीक्षण का सामना करना होगा। इस निरीक्षण के बाद ऐसे प्रतिष्ठान अगले पांच वर्षों तक निरीक्षण से मुक्त रहेंगे। इससे उद्यमियों को विभागीय हस्तक्षेप से राहत मिलेगी और औद्योगिक कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेंगे।
उन्होंने बताया कि जो कम जोखिम वाले गैर-खतरनाक प्रतिष्ठान स्व-प्रमाणन प्रणाली नहीं अपनाते हैं, उनके साथ-साथ मध्यम जोखिम वाले (खतरनाक) कारखानों के निरीक्षण का कार्य, उद्यमियों की सहमति से राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी एजेंसियों द्वारा किया जाएगा। इनका निरीक्षण तीन वर्ष में एक बार संपादित किया जाएगा।
स्टार्टअप नीति के तहत स्थापित गैर-खतरनाक श्रेणी के कारखाने, प्रतिष्ठान, इनक्यूबेटर्स और उत्कृष्टता केंद्रों को विशेष छूट दी गई है। ऐसे उद्यम अपनी स्थापना की तिथि से लेकर 10 वर्ष तक या जब तक उनकी स्टार्टअप स्थिति बनी रहती है, तब तक श्रम अधिनियमों के तहत निरीक्षण से मुक्त रहेंगे। केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन की सत्यापित शिकायत मिलने या किसी दुर्घटना के घटित होने की स्थिति में ही श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश की अनुमति से निरीक्षण किया जा सकेगा।
डॉ. शन्मुगा सुंदरम ने स्पष्ट किया कि केवल उच्च जोखिम वाले (अति-खतरनाक) कारखानों का निरीक्षण विभागीय निरीक्षणकर्ता अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। शिकायत या दुर्घटना की स्थिति में सक्षम अधिकारी की अनुमति से निरीक्षण संपादित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस थर्ड पार्टी निरीक्षण प्रणाली के लागू होने से प्रदेश में कम जोखिम वाले कारखाने, दुकानें और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्व-प्रमाणन व्यवस्था को अपनाकर निरीक्षण प्रक्रिया से मुक्त हो सकेंगे। इससे उद्योग एवं व्यापार के संचालन में विभागीय हस्तक्षेप समाप्त होगा, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, और प्रदेश में निवेशोन्मुखी वातावरण सशक्त रूप से स्थापित होगा। इस पहल से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान मिलेगा।
