जौनपुर। बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र में स्थित बारा/गोतौना टोल प्लाजा पर 14 जनवरी को लखनऊ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला के साथ टोल कर्मचारियों द्वारा की गई बर्बर मारपीट की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया है।
इस घटना की निंदा करते हुए दीवानी न्यायालय जौनपुर के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता विकास तिवारी की अगुआई में मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश शासन को जिलाधिकारी, के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया है।
अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि यह घटना न केवल एक अधिवक्ता के साथ हिंसा है, बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय की गरिमा, स्वतंत्रता एवं सुरक्षा पर गहरा आघात है। जौनपुर के अधिवक्ता नियमित रूप से इस राजमार्ग का उपयोग लखनऊ उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायिक कार्यों के लिए करते हैं। हमारे जनपद मे भी टोल प्लाजा सरकोनी ,मछलीशहर ,पवारा पर अराजकता सोच तथा आपराधिक प्रवृत्ति वाले टोलकर्मी रहते हैं जो भय का वातावरण बनाये रखते हैं। ऐसी घटनाएं हमारी सुरक्षा को खतरे में डालती हैं और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करती हैं। टोल प्लाजाएं सार्वजनिक सुविधा के लिए हैं, न कि गुंडागर्दी के अड्डे।
दीवानी न्यायालय के अधिवक्ताओं ने मांग रखी हैं कि प्रकरण की उच्च स्तरीय सीबीआई स्तर की जांच कराई जाए तथा सभी दोषी टोल कर्मचारियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कठोर सजा दी जाए, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए जैसी धाराओं का प्रयोग भी हो। टोल प्लाजा प्रबंधक एवं संचालक कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए, जिसमें लाइसेंस निलंबनध्रद्दीकरण शामिल हो।एनएचएआई को निर्देश दिए जाएं कि टोल कर्मचारियों की ट्रेनिंग एवं पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य हो।
प्रदेश के सभी टोल प्लाजाओं पर सीसीटीवी कैमरे, पुलिस चौकी एवं हेल्पलाइन स्थापित की जाए। अधिवक्ताओं के लिए विशेष पास या छूट की व्यवस्था किया जाय।
पीड़ित अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला को उचित क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए एवं उनके छीने गए सामान की बरामदगी सुनिश्चित की जाए। आशीष शुक्ल, रोहित पाठक, रजनीश शुक्ल, शशांक शेखर तिवारी, भैयालाल यादव, सुरज सोनी, कुलदीप यादव, विशाल मिश्रा,अंकित यादव, रंजीत यादव,अनिल मिश्रा ,देवेश मौर्य आदि उपस्थित रहे।
