अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले की हाई प्रोफाइल मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव दिलचस्प हो गया है।समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बाद अब आजाद समाज पार्टी ने भी मिल्कीपुर से अपना प्रत्याशी उतार दिया है।पार्टी के मुखिया नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण ने सूरज चौधरी को मिल्कीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी बनाकर उपचुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है।एक समय समाजवादी पार्टी के करीबी रहे सूरज चौधरी अब आजाद समाज पार्टी से चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं।
जानें कौन हैं सूरज चौधरी
सूरज चौधरी कभी समाजवादी पार्टी का अहम चेहरा माने जाते थे।सूरज चौधरी फैजाबाद से सपा सांसद अवधेश प्रसाद के करीबी रह चुके हैं।सूरज चौधरी ने हाल ही में 500 समर्थकों के साथ सपा छोड़कर भीम आर्मी से जुड़ गए।यह उपचुनाव सूरज चौधरी लिए न केवल अपनी सियासी पहचान को मजबूत करने का मौका है, बल्कि सपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।भाजपा की नजरें भी सूरज चौधरी की चुनावी रणनीति पर टिकी होंगी।मिल्कीपुर उपचुनाव के चुनावी मैदान में सूरज चौधरी के उतरने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। मिल्कीपुर में सभी प्रमुख उम्मीदवार एक ही समुदाय (पासी) से आते हैं।
सपा और भाजपा के उम्मीदवार कौन
मिल्कीपुर से समाजवादी पार्टी ने अजीत प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है।सपा का दावा है कि इस सीट पर उनकी आसान जीत होगी क्योंकि यह स्वर्गीय मित्रसेन यादव की धरती है, जहां सपा का गढ़ मजबूत रहा है।दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने चंद्रभान पासवान को उम्मीदवार बनाया है।भाजपा ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बड़े स्तर पर प्रचार शुरू कर दिया है। भाजपा ने छह मंत्रियों को प्रचार की जिम्मेदारी दी है।
मिल्कीपुर का जातीय समीकरण
आपको बता दें कि मिल्कीपुर विधानसभा 3.50 लाख से अधिक मतदाताओं वाली इस विधानसभा में सबसे अधिक आबादी दलितों की है।इस विधानसभा में 1.30 लाख से अधिक दलित वोटर हैं।सभी उम्मीदवार दलित बिरादरी से हैं, इसलिए उपचुनाव का नतीजा का रुख अगड़े-पिछड़े ही तय करेंगे। मिल्कीपुर विधानसभा में 55 हजार यादव और 30 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, 60 हजार से अधिक ब्राह्मण, 30 हजार क्षत्रिय, 50 हजार से अधिक कोरी, चौरसिया, पाल और मौर्य आदि बिरादरी के मतदाता हैं।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि मिल्कीपुर उपचुनाव में कांग्रेस और बसपा के चुनाव न लड़ने से सपा और भाजपा के प्रत्याशियों से निराश मतदाता आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन कर सकते हैं।
मिल्कीपुर में मुख्य मुद्दे
मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में स्थानीय मुद्दों का बोलबाला है। किसानों को छुट्टे जानवरों से हो रहे नुकसान और क्षेत्र के विकास की कमी बड़े मुद्दे हैं।सपा का कहना है कि क्षेत्र की जनता अखिलेश यादव और उनकी नीतियों पर भरोसा करती है,जबकि भाजपा विकास के नाम पर वोट मांग रही है।यह उपचुनाव पासी समुदाय के तीन मजबूत नेताओं के बीच मुकाबला बन गया है।सूरज चौधरी के मैदान में आने से सपा और भाजपा दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।सपा और भाजपा के मुकाबले में आजाद समाज पार्टी ने दलित और युवा वोटरों को लुभाने की रणनीति बनाई है। 5 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले मिल्कीपुर विधानसभा के मतदाता अपने विकल्पों को ध्यान से परख रहे हैं।सपा और भाजपा अपने-अपने दावों के साथ विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं, जबकि आजाद समाज पार्टी ने इस मुकाबले में नई जान डाल दी है। 8 फरवरी को चुनावी नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि मिल्कीपुर विधानसभा के मतदाता किसे अपना विधायक चुना है,लेकिन इतना तय है कि सूरज चौधरी की उम्मीदवारी ने इस उपचुनाव को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
पिछली बार किसे कितने मिले थे वोट
सपा के अवधेश प्रसाद को 103,905 वोट मिले थे,भाजपा के बाबा गोरखनाथ को 90,957 वोट मिले थे,बसपा की मीरा देवी को 14,427 मिले थे और कांग्रेस की नीलम कोरी को 3,166 वोट मिले थे।
