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•13 से 18 नवम्बर तक लखनऊ में राष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव, सोनभद्र में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में वृहद कार्यक्रम।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने आज लोक भवन में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकनायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर “जनजाति गौरव दिवस” के अंतर्गत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
इस अवसर पर दोनों मंत्रियों ने बताया कि 13 से 18 नवम्बर 2025 तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ में “राष्ट्रीय जनजाति भागीदारी उत्सव” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही 15 नवम्बर को जनपद सोनभद्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल होंगे।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। बिरसा मुंडा को जनजातीय समुदाय भगवान की तरह पूजता है, इसलिए भारत सरकार ने वर्ष 2022 से उनकी जयंती को “जनजाति गौरव दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को जनजातीय संस्कृति के माध्यम से सशक्त बनाने का प्रयास है, जिसमें देश के विभिन्न अंचलों की जनजातियों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधताओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
इस आयोजन को केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम न बताते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत की सामासिक संस्कृति का जीवंत प्रतीक बनेगा, जहाँ जनजातियों की जीवनशैली, पारंपरिक शिल्प, लोककला, लोकसंगीत, खानपान और वन संस्कृति की झलक एक ही मंच पर दिखाई देगी। जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भरता की परंपरा इस आयोजन की आत्मा होगी।
जयवीर सिंह ने बताया कि इस उत्सव में अरुणाचल प्रदेश “भागीदार राज्य” के रूप में शामिल रहेगा, जबकि 18 राज्यों के लगभग 600 जनजातीय कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक एकता का संदेश देंगे। उत्सव में पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, लोक चित्रकला और जनजातीय आभूषणों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होगी।
प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय समुदाय के सम्मान और विकास का पर्व है। जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है — उनकी भाषाएँ, वेशभूषा, जीवनदर्शन और सामूहिक जीवनशैली राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती हैं।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल जनजातीय गौरव का प्रतीक बनेगा, बल्कि उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
असीम अरुण ने बताया कि उत्सव के दौरान जनजातीय पारंपरिक खेल, लोककला कार्यशालाएँ, फोक टेल्स (कहानी कथन सत्र), वन उत्पाद प्रदर्शनी और क्षेत्रीय व्यंजन प्रतियोगिता जैसी विविध गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही जनजातीय युवाओं की भागीदारी से आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत किया जाएगा।
समाज कल्याण मंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में इस ऐतिहासिक “जनजाति भागीदारी उत्सव” में सम्मिलित होकर जनजातीय गौरव, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता के इस पर्व को सफल बनाएं।
इस अवसर पर निदेशक समाज कल्याण कुमार प्रशांत, निदेशक लोककला एवं जनजाति संस्कृति संस्थान अतुल द्विवेदी तथा दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
