
आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी
अयोध्या/फैजाबाद।
पतित पावनी मां सरयू के तट पर बसा यह नगर कभी अवध की राजधानी रहा है। रामायण कालीन ‘अयोध्या’ से लेकर नवाबी दौर के ‘फ़ैज़ाबाद’ और आज पुनः ‘अयोध्या’ नाम से विख्यात यह नगर समय के साथ कई उतार-चढ़ाव देखता रहा है। यह वही धरती है, जहां श्रीराम का जन्म हुआ और जहां अवध के नवाबों ने अपनी राजधानी बसाकर कला, संस्कृति और स्थापत्य की विरासत छोड़ी।
नवाबों का रिश्ता और फ़ैज़ाबाद की नींव
सन् 1730 में अवध के पहले नवाब सआदत अली खां ने अयोध्या को राजधानी बनाकर इसका नाम फ़ैज़ाबाद रखा। ‘फ़ैज़’ यानी ‘फ़ायदा’, यानी ऐसी जगह जहां सबको लाभ और आराम मिले। बाद में नवाब सफदरजंग ने यहां सैन्य मुख्यालय और भवनों की नींव रखी, तो तीसरे नवाब शुजाउद्दौला ने इसे स्वर्णकाल प्रदान किया। महल, बाग-बगीचे, किले और स्मारक बनवाकर उन्होंने फ़ैज़ाबाद को व्यापार और संस्कृति का केंद्र बना दिया।
निशानियां जो आज भी शान से खड़ी हैं
फ़ैज़ाबाद आज भी गुलाबबाड़ी, बहू बेगम का मकबरा, बनीखानम का मकबरा और हाजी इकबाल की दरगाह जैसी धरोहरों के लिए पहचाना जाता है। गुलाबबाड़ी में शुजाउद्दौला की कब्र है, जहां चारबाग शैली की बागवानी हर किसी को आकर्षित करती है। वहीं, संगमरमर से बना बहू बेगम का मकबरा ‘मिनी ताजमहल’ कहलाता है। सूफी संत बड़ी बुआ की दरगाह आज भी सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनी हुई है।
बाजार और चौक की रौनक
नवाबी दौर में बसे चौक, त्रिपोलिया शाही बाजार, घंटाघर और दिल्ली दरवाजा जैसे स्थल आज भी पुराने वैभव की गवाही देते हैं। यहां के बाजारों में शाही परिवार के लिए अलग रिवाज थे—दुकानदार दुकान छोड़ देते और केवल महिलाएं ग्राहकों की सेवा करतीं।
बाग-बगीचों की धरती
लालबाग, आसफबाग, अंगूरीबाग और मोतीबाग जैसे उद्यान कभी इस शहर की शान हुआ करते थे। कंपनी गार्डन और गुप्तार घाट जैसे स्थल आज भी पर्यटकों को अतीत की झलक दिखाते हैं।
अतीत की विरासत, वर्तमान का गौरव
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने यहां की कई इमारतों को संरक्षित घोषित किया है, जिनमें गुलाबबाड़ी और बहूबेगम का मकबरा प्रमुख हैं। वहीं, अयोध्या के पौराणिक टीले—मणि पर्वत, कुबेर पर्वत और सुग्रीव पर्वत भी इसी इतिहास का हिस्सा हैं।
लेखक परिचय
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम-सामयिक विषयों, साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर लेखन करते रहते हैं।)
