केके मिश्रा संवाददाता।
संत कबीर नगर। संत कबीर नगर के जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) मनोज कुमार यादव पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सरकारी धन की हेराफेरी और नियमों के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। यह शिकायत प्रयागराज के सामाजिक कार्यकर्ता पी.एल. आहुजा द्वारा उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गए पत्र के आधार पर उजागर हुई है। शिकायत सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
उप निदेशक ने दिया अंतिम नोटिस, 48 घंटे में स्पष्टीकरण अनिवार्य:-
बस्ती मंडल के उप निदेशक (पंचायत) समरजीत यादव ने 12 नवंबर 2025 को जारी पत्र में DPRO को सिर्फ 48 घंटे के भीतर सभी आरोपों पर साक्ष्य सहित जवाब देने का निर्देश दिया है।
उन्होंने बताया कि शासन के सख्त आदेश के बावजूद DPRO मनोज कुमार यादव ने पहले भेजे गए नोटिस (03 अक्टूबर 2025) का कोई जवाब नहीं दिया, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया है।
उप निदेशक ने चेतावनी दी है कि उत्तर न मिलने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी और रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
सात बिंदुओं में दर्ज गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता पी.एल. आहुजा ने अपनी शिकायत (25 जून 2025) में DPRO पर कुल सात गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है, जिनमें प्रमुख हैं—
वेतन में बड़ी हेराफेरी – गलत पे-लेवल पर वेतन आहरित करने और मूल सेवापुस्तिका उपलब्ध न कराने का आरोप।
मानदेय रोककर वसूली का आरोप – संविदा कंप्यूटर ऑपरेटरों का महीनों मानदेय रोकना और दबाव बनाकर धनराशि मांगना।
सरकारी वाहन का दुरुपयोग – सरकारी गाड़ी से लखनऊ स्थित निजी आवास तक जाना और सफाई कर्मी से वाहन चलवाना।
डीजल की बड़ी हेराफेरी – लॉगबुक में हेरफेर कर सरकारी धन का नुकसान पहुंचाने का आरोप।
सचिवों और पंचायत अधिकारियों का वेतन रोके जाने का आरोप – 5–6 महीने तक भुगतान न करने और अवैध वसूली के बाद ही एरियर जारी करने का आरोप।
ग्राम पंचायतों की जांच रिपोर्ट रोके जाने का आरोप – जांच से मुक्ति देने में कथित आर्थिक लेनदेन।
गैरकानूनी ढंग से वित्तीय अधिकार देने का आरोप – 2018 व 2022 के ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रभारी पद देकर डोंगल एक्टिवेशन कराना।
इनमें से कई आरोपों की पुष्टि कुछ पंचायत अधिकारियों और सचिवों ने नाम न छापने की शर्त पर की है।
निष्पक्ष जांच और निलंबन की मांग:-
शिकायतकर्ता पी.एल. आहुजा ने शासन से मांग की है कि DPRO मनोज कुमार यादव को तत्काल निलंबित करते हुए संतकबीरनगर से हटाया जाए और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे हाईकोर्ट में PIL (जनहित याचिका) दाखिल करेंगे।
