मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में एग्रीटेक, प्लांट और हेल्थ साइंसेज विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महत्वपूर्ण निष्कर्षों के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
अंतिम दिन यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के प्रो. कदंबोट सिद्दीकी ने “टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए फसल अवशेष प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वैज्ञानिक शोध प्रकाशनों के महत्व और भारत में शैक्षणिक विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
औरंगाबाद स्थित फाउंडेशन फॉर एडवांस्ड ट्रेनिंग इन प्लांट ब्रीडिंग के निदेशक डॉ. शरण अंगादी ने फसल पौधों की लचीलापन रणनीतियों पर अपने विचार रखे। कर्नाटक के बल्लारी स्थित अव्याग्रह रिसर्च एंड एनालिटिक्स एलएलपी के डॉ. अविनाश गोपा ने ‘सेरीमित्र’ नामक एआई आधारित प्रणाली के माध्यम से टिकाऊ रेशम उत्पादन की जानकारी दी।
सत्र की अध्यक्षता यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, बेंगलुरु के डॉ. सिद्दैया एस. ने की, जबकि सह-अध्यक्षता संस्कृति विश्वविद्यालय के डॉ. गंगाधर हुगर ने की।समापन समारोह में कुलपति डॉ. एम.बी. चेट्टी की अध्यक्षता में प्रो. कदंबोट सिद्दीकी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. सिद्दैया को शिक्षा, छात्र मार्गदर्शन और परीक्षा प्रणाली में सुधार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ शिक्षाविद पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।सम्मेलन ने बौद्धिक आदान-प्रदान और भविष्य के शोध सहयोग के लिए एक सशक्त मंच प्रदान किया।
