सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति, उत्तर प्रदेश राजभवन के निर्देश के क्रम में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में गत कई दिनों से आयोजित गुजरात स्थापना दिवस कार्यक्रम श्रृंखला का शुक्रवार को भव्य समापन किया गया। गुजरात दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।



गौतम बुद्ध प्रेक्षागृह में आयोजित इस समापन कार्यक्रम में कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुजरात प्रदेश के स्थापना दिवस के आयोजन का निर्देश प्राप्त होने के उपरांत विश्वविद्यालय में लगातार विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने सभी को गुजरात दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह एक अत्यंत स्वस्थ एवं प्रेरणादायक परंपरा है, जिसमें एक राज्य का स्थापना दिवस दूसरे राज्य में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का भाव विकसित करते हैं। गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक जीवन की जीवंतता तथा उसकी आध्यात्मिक विविधता भारत की साझा विरासत को समृद्ध करती है। वहाँ की परंपराएँ, लोकजीवन, धार्मिक सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक चेतना देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। गुजरात की आर्थिक प्रगति और विकास मॉडल आज भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित है।
कुलपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल को भारत के शिल्पकार के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि उनका योगदान राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय है। साथ ही महात्मा गांधी, जिनका गहरा संबंध गुजरात से रहा है, उन्होंने न केवल भारत बल्कि संपूर्ण विश्व को अहिंसा का संदेश दिया। आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में गांधीजी का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गौतम बुद्ध के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय में शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
कुलपति ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि गुजरात दिवस केवल एक राज्य के स्थापना दिवस का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की संघीय संरचना, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता के जीवंत स्वरूप का प्रतीक है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों की परंपराओं, भाषाओं, लोकजीवन और विकास यात्रा को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा तभी साकार होगी जब हम एक-दूसरे की सांस्कृतिक विशेषताओं को जानें, समझें और उनका सम्मान करें। गुजरात दिवस जैसे आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं, जो राष्ट्र की एकात्म चेतना को सुदृढ़ बनाते हैं।
इस अवसर पर कुलसचिव ने कहा कि विगत दिनों से चल रही इस कार्यक्रम श्रृंखला के समापन अवसर पर अत्यंत सुखद अनुभूति हो रही है। परीक्षा के व्यस्त समय के बावजूद विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सराहनीय है तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों का सहयोग कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण रहा है।
कार्यक्रम की संयोजक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर नीता यादव ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को देश की विविध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं और उनमें राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में “बुद्धं शरणं गच्छामि” गीत की मनमोहक प्रस्तुति संगीतकार साकेत एवं उनकी टीम द्वारा दी गई। इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा सोलो एवं समूह नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें विशेष रूप से पारंपरिक गुजराती गरबा नृत्य ने सभी का मन मोह लिया।
महात्मा गांधी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो” का भावपूर्ण गायन भी किया गया। इसके अतिरिक्त गुजरात की संस्कृति, सामाजिक जीवन एवं आर्थिक विकास पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसे विद्यार्थियों ने अत्यंत रुचि के साथ देखा।कार्यक्रम में प्रोफेसर प्रकृति राय, प्रोफेसर सुनील श्रीवास्तव, प्रो लक्ष्मण सिंह सहयुक्त आचार्य आशुतोष वर्मा, डॉ यशवंत डॉ रक्षा डॉ. विमल वर्मा, अमरजीत यादव, डॉ. यशवंत यादव, डॉ. प्रदीप पांडेय, डॉ अमरजीत डॉ. दीप्ति गिरी, डॉ. किरण, डॉ. आभा द्विवेदी डॉ राजेश सहित अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन वाणिज्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शिवम शुक्ला द्वारा किया गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियाँ अत्यंत उत्साहवर्धक एवं सराहनीय रही।
