आजमगढ़। जनपद के जीयनपुर रेंज स्थित प्रसिद्ध सलोना ताल/वेटलैंड में इस वर्ष विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर 2 फरवरी 2026 को भव्य बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। पक्षियों के मनमोहक कलरव के बीच आयोजित होने वाले इस फेस्टिवल की थीम “आर्द्र भूमि और पारम्परिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव” रखी गई है।
सगड़ी तहसील से मात्र तीन किलोमीटर पूर्व स्थित लगभग 282.85 हेक्टेयर में फैली सलोना ताल न केवल जनपद बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। ठंड के मौसम में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी पहुंचते हैं, जिससे ताल इन दिनों पक्षियों के कलरव से गूंज रही है। प्रतिदिन पक्षियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
डीएफओ आकांक्षा जैन की पहल पर इस वर्ष सलोना ताल में वर्ल्ड वेटलैंड डे को बर्ड फेस्टिवल के रूप में मनाया जा रहा है। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। फेस्टिवल में जवाहर नवोदय विद्यालय सहित जीयनपुर क्षेत्र के एक जूनियर हाईस्कूल के लगभग 150 छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। कार्यक्रम में जाने-माने पक्षी विशेषज्ञ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर जानकारी साझा करेंगे।
बर्ड फेस्टिवल के दौरान पक्षी फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिता के साथ प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यहां जल सुरक्षा, आर्द्र भूमि के संरक्षण और जैव विविधता की अहम भूमिका पर विस्तार से चर्चा होगी। यह आयोजन युवाओं और आमजन को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।शील इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
इस आयोजन से प्रकृति आधारित इको टूरिज्म को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। वन विभाग आजमगढ़ पर्यटन के साथ मिलकर जनपद के वेटलैंड, ऐतिहासिक स्थलों और प्राकृतिक सौंदर्य को जोड़ते हुए आकर्षक टूरिज्म सर्किट विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। सलोना ताल में विदेशी और स्थानीय पक्षियों की विविध प्रजातियों की मौजूदगी इस फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण होगी।
डीएफओ आकांक्षा जैन ने बताया कि हाल ही में हुई शीतकालीन सारस गणना में सलोना ताल क्षेत्र में 9 सारस पाए गए हैं, जो यहां के अनुकूल पर्यावरण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि बर्ड फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य युवाओं में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे बर्ड फेस्टिवल/बर्ड वॉचिंग कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और प्रकृति के इस उत्सव का आनंद उठाये।
