लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में नारी सशक्तिकरण विषय पर आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सत्र आधी आबादी को समर्पित है। इसका उद्देश्य महिलाओं के स्वावलंबन और सशक्तिकरण में बाधक तत्वों की पहचान कर उन्हें दूर करने का मार्ग प्रशस्त करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी विधानसभा इस दिशा में देश को नई दिशा देने की क्षमता रखती है और यह समय आत्ममंथन का है। अपने संबोधन में उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन न करना नारी गरिमा के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रयासों से महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश विधानसभा में 11-12 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 33 प्रतिशत करना आवश्यक है।
कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2016 की तुलना में 2025 तक हत्या, दहेज मृत्यु और दुष्कर्म के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में मात्र 13 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल का हिस्सा थीं, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई हैं। यह बदलाव राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार बना है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री जन-धन योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूती मिली है।उन्होंने ‘लखपति दीदी’ और बीसी सखी जैसी पहलों को ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में अहम बताया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना समय की मांग है।अंत में उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे इस विशेष सत्र में सक्रिय भागीदारी करें और महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने में सहयोग करें। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सत्र नारी सशक्तिकरण की दिशा में नई ऊर्जा और संकल्प का संचार करेगा।
