केके मिश्रा संवाददाता।
संत कबीर नगर। उदया इंटरनेशनल स्कूल, भुजैनी, संत कबीर नगर के प्रार्थना स्थल में बसंत पंचमी का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह समारोह केवल एक उत्सव मात्र न होकर ज्ञान, कला, साधना और राष्ट्रचेतना का सजीव प्रतीक बनकर उपस्थित हुआ, जिसमें विद्यालय परिवार की सृजनशीलता और अनुशासन की अद्भुत झलक दृष्टिगोचर हुई।
कार्यक्रम का श्री गणेश वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां भारती का षोडशोपचार पूजन, प्रबंधक श्री अंकित राज तिवारी व प्रधानाचार्य द्वारा मंगलमय वातावरण में हुआ। प्रार्थना स्थल मंचोपरि कार्यक्रमों की झांकी की बागडोर का उत्तरदायित्व कक्षा सातवीं की छात्रा विभा चौधरी एवं कक्षा छठवीं की छात्रा ऋषिका ने अपने ओजस्वी, मधुर एवं शालीन वाणी-विन्यास द्वारा अत्यंत प्रभावशाली ढंग से निभाया। उनकी सुस्पष्ट उच्चारण शैली, आत्मविश्वास एवं भाषिक सौंदर्य ने संपूर्ण कार्यक्रम को सजीवता प्रदान की।
इसके उपरांत प्रधानाचार्य श्री शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी एवं समन्वयक श्रीमती पुष्पांजलि सिंह, श्री मनप्रीत सिंह तथा श्रीमती अनीता तिवारी के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण का पावन अनुष्ठान संपन्न हुआ। यह क्षण मानो तमस से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर तथा जड़ता से चेतना की ओर अग्रसर होने का दैवी संकेत था।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कक्षा सातवीं की छात्राएं तन्वी, आराध्या एवं श्रेया द्वारा प्रस्तुत ‘जयति जय माँ सरस्वती’ गीत ने संपूर्ण सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। यह प्रस्तुति न केवल सुरों की मधुरता से ओतप्रोत थी, बल्कि उसमें भावों की पवित्रता और श्रद्धा की सुगंध भी विद्यमान थी।
तत्पश्चात छायावाद के वृहत्रयी कवियों में ‘शिव’ की उपाधि से अलंकृत, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अमर रचना ‘वर दे वीणा वादिनी’ पर आधारित नृत्य-नाट्य झांकी कक्षा सातवीं की छात्रा अर्पिता द्वारा प्रस्तुत की गई। यह प्रस्तुति काव्यात्मक सौंदर्य, भावात्मक गहनता और नृत्यात्मक लय का अनुपम संगम थी, जिसमें शब्द, भाव और भंगिमा तीनों का त्रिवेणी-संगम स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हुआ।
पश्चात ‘शुभ दिन आयो’ नामक सामूहिक नृत्य में कक्षा सातवीं की छात्राएँ अंशिका, अनन्या, आराध्या, आरुषि, शिवानी एवं मानवी ने अपनी ऊर्जस्वित, समन्वित एवं सजीव प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य में वसंत ऋतु की उल्लासपूर्ण चेतना, प्रकृति की नवचेतना और बालमन की निष्कलुष प्रसन्नता स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
कार्यक्रम की वैचारिक गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करते हुए प्रधानाचार्य श्री शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी ने अपने सारगर्भित संबोधन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महाकवि निराला एवं वसंत ऋतुराज के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि वसंत केवल ऋतु नहीं, अपितु नवजीवन, नवसंकल्प और नवचेतना का प्रतीक है, जो मानव को कर्म, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम की अगली कड़ी में कक्षा 11 की छात्रा अनुप्रिया यादव द्वारा अंग्रेजी भाषा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर दिया गया ओजपूर्ण भाषण कार्यक्रम को सजाने का प्रयास किया । उसके वक्तव्य में आत्मबल, देशभक्ति और नेतृत्व का प्रखर स्वर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
समग्रतः यह समारोह न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला ही नहीं वरन् यह ज्ञान, कला, संस्कार और राष्ट्रभाव की चतुर्दिक सुगंध से सुवासित एक दिव्य अनुष्ठान था, जिसने विद्यार्थियों के मन-मस्तिष्क में सृजनात्मकता, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा के बीज अंकुरित कर दिए। वास्तव में यह वसंत पंचमी समारोह विद्यालय की शैक्षिक चेतना का स्वर्णिम प्रतिबिंब बनकर स्मरणीय हो उठा।
