लखनऊ। गोसाईगंज थाना क्षेत्र में फर्जी फर्म मालिक बनकर ट्रक चालक को गुमराह करते हुए ट्रक में लदी 1180 बोरी पीओपी उतरवा लेने की बड़ी ठगी की घटना का पुलिस ने मात्र 72 घंटे के भीतर सफल अनावरण कर दिया। संयुक्त पुलिस टीम ने घटना में शामिल तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से पूरी 1180 बोरी पीओपी, घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिलें और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
यह कार्रवाई लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर, पुलिस उपायुक्त दक्षिणी अमित कुमार आनंद, अपर पुलिस उपायुक्त दक्षिणी रल्लापल्ली बसंथ कुमार तथा सहायक पुलिस आयुक्त गोसाईगंज ऋषभ यादव के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक डी.के. सिंह और प्रशिक्षु आईपीएस सारिका चौधरी के नेतृत्व में थाना गोसाईगंज और सर्विलांस टीम जोन दक्षिणी की संयुक्त टीम ने इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया।
पुलिस के अनुसार 4 अप्रैल 2026 को ट्रक चालक बलराज सिंह, निवासी ग्राम ठूठयावाली कैच्चया जनपद मनसा, पंजाब, दंतौर से पीओपी (सकरनी ब्रांड) की 1180 बोरियां लादकर बाराबंकी स्थित एक फर्म में पहुंचाने के लिए रवाना हुआ था। जब ट्रक गोसाईगंज क्षेत्र में पहुंचा, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर स्वयं को संबंधित फर्म का मालिक बताया और चालक को निर्देश दिया कि माल बाराबंकी न ले जाकर गोसाईगंज में ही उतार दिया जाए।
कुछ देर बाद दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल कर खुद को फर्म का मुंशी बताने वाले व्यक्ति ने चालक से संपर्क किया और माल उतरवाने के लिए आने की जानकारी दी। इसके कुछ समय बाद तीन युवक डाला और ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मौके पर पहुंचे और चालक को विश्वास में लेकर ट्रक में लदी सभी 1180 बोरी पीओपी उतरवा ली। इसके बाद अभियुक्तों ने माल को ग्राम कबीरपुर स्थित किराये के एक कमरे में रखवा दिया और मौके से फरार हो गए।
बाद में जब माल भेजने वाली कंपनी ने भिलवल स्थित फर्म से संपर्क किया तो माल न पहुंचने की जानकारी मिली। इसके बाद ट्रक चालक से पूछताछ की गई, जिसमें उसने बताया कि उसने फर्म मालिक के निर्देश पर गोसाईगंज में माल उतार दिया था। इस पर संदेह होने पर जब संबंधित मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो सभी नंबर बंद मिले। तब चालक को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास हुआ और उसने 14 अप्रैल 2026 को थाना गोसाईगंज में मुकदमा दर्ज कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल दो विशेष टीमों का गठन किया। टीम ने घटनास्थल के आसपास तथा लखनऊ-सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
साथ ही सर्विलांस के माध्यम से घटना में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर साक्ष्य एकत्रित किए गए। लगातार प्रयास के बाद 17 अप्रैल 2026 की शाम सर्विलांस टीम की मदद से तीनों अभियुक्तों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के नीचे स्थित बेली अंडरपास से गिरफ्तार कर लिया गया।पूछताछ में सामने आया कि अभियुक्त सड़क किनारे खड़े ट्रकों पर लिखे मोबाइल नंबरों को नोट कर लेते थे और बाद में ड्राइवर को फोन कर स्वयं को फर्म मालिक या मुंशी बताकर झांसे में लेते थे। इसके बाद तय स्थान पर पहुंचकर माल को किसी अन्य स्थान पर उतरवा लेते थे।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में था।गिरफ्तार अभियुक्तों में तौफीक आलम (उम्र करीब 19 वर्ष), राजबाबू (उम्र करीब 20 वर्ष) और गुलाम गौस (उम्र करीब 21 वर्ष), निवासी ग्राम हरिहरपुर थाना तमकोहीराज जनपद कुशीनगर शामिल हैं।
पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से 1180 बोरी पीओपी (सकरनी ब्रांड), एक मोटरसाइकिल टीवीएस अपाचे (संख्या UP57-CC-0636), एक मोटरसाइकिल पल्सर (संख्या UP57-BV-2398) तथा चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस संबंध में थाना गोसाईगंज में मु0अ0सं0 138/26 धारा 318(4)/319(2)/61(2)/317(2) बीएनएस के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है तथा यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने अन्य स्थानों पर इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है या नहीं।
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